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CBI विवाद - जब संविधान की धज्जियाँ उड़ती हैं, तब रात को जूते की टाप सुनाई देती है - रात का सच

भ्रष्टाचार -  जब संविधान की धज्जियाँ उड़ती हैं, तब रात को जूते की टाप सुनाई देती है - जाने क्या है रात का राज  जब भारत की जनता गहरी नींद में सो र ही थी, तब दिल्ली पुलिस के जवान अपने जूते की लेस बाँध रहे थे। बेख़बर जनता को होश ही नहीं रहा कि पुलिस के जवानों के जूते सीबीआई मुख्यालय के बाहर तैनात होते हुए शोर मचा रहे हैं। लोकतंत्र को कुचलने में जूतों का बहुत योगदान है। जब संविधान की धज्जियाँ उड़ती हैं, तब रात को जूते बाँधे जाते हैं। पुलिस के जवान सीबीआई दफ्तर को घेर लेते हैं। रात के पौने एक बज रहे होते हैं। वैसे अंग्रेज़ों में वह गुडमार्निंग कहने का होता है। हम रात को रात कहते हैं। मुल्क पर काली रात का साया गहरा गया है। तभी एक अफ़सर जो शायद जागा हुआ था, उस कुर्सी पर बैठने के लिए घर से निकलता है जिस कुर्सी पर बैठे आलोक वर्मा ने उसके ख़िलाफ़ CVC यानी केंद्रीय सतर्कता आयुक्त से गंभीर आरोपों में जाँच की अर्ज़ी दी है। CVC के वी चौधरी एम नागेश्वर राव को सीबीआई का नया चीफ़ बनाने का रास्ता साफ़ कर देते हैं। एम नागेश्वर राव अपने नंबर वन चीफ़ आलोक वर्मा को हटाने के आदेश देते हैं जिसे छुट्टी पर भेजन

रोहिंग्या मुसलमान देश के लिए खतरा है - मोदी सरकार

म्यांमार मूल  के रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर सभी दक्षिण एशिया देशों में बवाल मचा हुआ है भारत  सरकार भी इस समुदाय को लेकर कोई  स्पष्ट सकारात्मक राय नहीं रखता है | हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि, "रोहिंग्या मुसलमान देश की सुरक्षा के लिए खतरा है और इस समुदाय के लोग आतंकी संगठनों से भी जुड़े हो सकते हैं" मोदी सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में जगह देने से पीछे यह कहकर हट रही है कि इससे भारत की आतंरिक सुरक्षा को खतरा होगा    |  ज्ञात हो बिहार में हुए बम्ब ब्लास्ट में भी रोहिंग्य मुसलमान लोगो को पकड़ा गया है | जिनसे पूछताछ में सामने आया था की म्यांमार   बोधिस्ट देश है और बोध धर्म का जन्म भारत में हुवा है इस लिए बोधिस्तो को टारगेट कर मार कर बदला लेना है | इस आधार पर देश के लिए   रोहिंग्या   मुसलमान खतरा ही मात्र | इसके साथ ही अगर भारत   "रोहिंग्या मुसलमान     को दे श में रहने देती है तो भविष्य में देश के किये अनेक चुनोतिया सामने खडी हो सकती है | यदि भारत के अतीत पर नजर दौड़ाई जाए तो शरणार्थियों के लिए भारत हमेशा दरवाजे खोलता रहा है  जैसे