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कथित गो -रक्षको पर लगेगी लगाम -सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने गो रक्षको  द्वारा की जाने वाली हिंसक घटनाओं को  रोकने के लिए राज्यों को 7 दिनो के भीतर टास्क फ़ोर्स गठित करने का आदेश जारी किया है कोर्ट ने इसकी तहत  हर जिले में वरिष्ट पुलिस अधिकारी को नोडल  अधि कारी नियुक्त करने और कानून तोड़ने वाले समूहो को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आदेश भी दिया है  देश में गोहत्या के नाम पर हो रही हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है, कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से गोरक्षकों पर लगाम कसने को कहा है साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकारों को आदेश भी दिया है कि वह गो रक्षकों से  निपटने के लिए  टॉस्क फोर्स बनाएं |                                                                                                                                                           कोर्ट ने कहा कि हर जिले में गठित टॉस्क फोर्स में वरिष्ठ पुलिसकर्मियों को नोडल अधिकारी के रूप में रखा जाए , सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य, दोनों को निर्देश भी दिया है कि गोरक्षा के नाम पर कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कारवाई करे साथ ही  

सुप्रीम कोर्ट ने माना निजता है - मौलिक अधिकार

सुप्रीम कोर्ट  की 9 जजों की  संविधान पीठ ने आज सुबह { गुरूवार }  को सर्व सहमती  ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार करार दिया है  |  पीठ ने कहा कि निजता का अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 के तहत दिए गए अधि कारों का हिस्सा है |    ज्ञात हो इस से पहले 1950 में और 1662 के फेसले में सुप्रीम कोर्ट के निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना था   फ़ैसला सुनाने वाली इस बेंच में कौन-कौन जज थे. आइए जानते हैं-   चीफ़ जस्टिस जे . एस .  खेहर जस्टिस शरद अरविंद बोबडे जस्टिस राजेश कुमार अग्रवाल जस्टिस  रोहिंग्टन  फली नरीमन जस्टिस अभय मनोहर  सप्रे जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ जस्टिस  एस.  अब्दुल नज़ीर    उपरोक्त जजों की पीठ से सर्वसहमति से "  निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार " माना है |

प्रधानमंत्री मोदी ने किया - तीन तलाक फ़ेसले का स्‍वागत -

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने तीन तलाक पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले का स्‍वा गत किया है। इ स शक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावशाली उपाय है। फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं को समानता का अधिकार मिलता है और यह महिला स   प्रधानमंत्री ने कहा, ‘तीन तलाक पर माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला ऐतिहासिक है। इससे मुस्लिम महिलाओं को समानता का अधिकार मिलता है और यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावशाली उपाय है’।

तलाक......तलाक .......तलाक अब और नहीं -

तीन तलाक के मामले में आज शीर्ष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा- केंद्र सरकार 6 महीने में संसद में इसको लेकर कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर के नेतृत्व में 5 जजों की  पीठ ने फैसला सुनाया। कोर्ट में तीन जज तीन तलाक को अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं 2 दो जज इसके पक्ष में नहीं थे। तीन तलाक  फैसले से जुड़े तथ्य - सुनवाई के दौरान जस्टिस आरएफ नरिमन, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस यूयू ललित तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे. वहीं चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर इसके पक्ष में थे . सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन तलाक को खत्म कर दिया है, कोर्ट ने इसे अंसवैधानिक बताया दिया है. -  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक आर्टिकल 14, 15 और 21 का उल्लंघन नहीं है. यानी तीन तलाक असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता है.   कोर्ट की कार्यवाही शुरू, मुख्य न्यायधीश जे. एस. खेहर ने बोलना शुरू किया. सुप्रीम कोर्ट के कमरा नंबर 1 में होगी मामले की सुनवाई.   याचिका कर्ता सायर