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आरक्षण को लेकर अमित शाह ने दिया ये बड़ा बयान, कहा...

नई दिल्ली। एक तरफ एससी/एसटी के भारत बंद को लेकर पूरे देश में बबाल मचा हुआ है। वहीं दूसरी और विपक्षी पार्टियों ने अभी केन्द्र की बीजेपी और मोदी सरकार पर निशाना साधा हुआ है। विपक्षी पार्टियों के आरोपों और एससी/एसटी से जुड़ेे लोगों को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को एक बड़ा बयान दिया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि वह नात तो देश में से आरक्षण हटाएगी और ना ही किसी को हटाने देगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपने ओडिशा दौरे के दौरान एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। सभा के दौरान उन्होंने कहा कि संविधान में बी आर अंबेडकर द्वारा तय आरक्षण की नीति को कोई बदलने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता है। उन्होंने एससी- एसटी( अत्याचार निवारण) अधिनियम को कथित रूप से कमजोर करने के खिलाफ आयोजित भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में करीब एक दर्जन लोगों की मौत के लिए कांग्रेस और विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘बंद का आह्वान क्यों किया गया जब प्रधानमंत्री ने लोगों को आश्वासन दिया था कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ सरकार पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। बंद के दौरान दस लोग मारे गए। कांग्रेस और

PM मोदी ने बाबा साहेब के लिए कही ये बात-

नई दिल्ली। एक तरफ जहां पूरे देश में एससी/एसटी ने सोमवार को भारत बंद का एलान किया था और पूरे देश में बंद का असर देखा गया था। आखिरकार इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी बयान देना पड़ा है। पीएम मोदी ने बुधवार को बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की विरासत का राजनीतिकरण करने के लिए राजनीतिक दलों पर निशाना साधा।उन्होंने इस दौरान कहा कि उनकी सरकार ने बाबा साहब का सम्मान बढ़ाने का जितना कार्य किया, उतना किसी दूसरी सरकार ने नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को नई दिल्ली वेस्टर्न कोर्ट एनेक्सी की नई इमारत के उद्घाटन कार्यक्रम में यह बात कही।   उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि आंबेडकर को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए बल्कि उनके दिखाए हुए रास्ते पर चलना चाहिए। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि अंबेडकर के नाम पर केवल राजनीति की गई। उन्होंने कहा कि अलीपुर रोड स्थित जिस मकान में बाबा साहब ने अंतिम सांस ली, उसे अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को सर्मिपत किया जाएगा। पीएम मोदी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अटल सरकार के समय आंबेडकर से जुड़े दो भवनों के निर्माण की योजना बनाई गई।

मोदी सरकार झुकी - दलित आंदोलन तेज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एससी/एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। देश भर में दलित संगठनों ने इस फैसले के विरोध में बंद का आयोजन किया है। शीर्ष अदालत के फैसले पर दलित संगठनों की नाराजगी को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऐलान किया था कि वह इस मसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। ये विरोध अब हिंसात्मक रूप लेता जा रहा है। देश में कई जगहों पर तोड़फोड़, पथराव, गाड़ियां जलाना, दुकाने बंद करवाने जैसी घटनाएं हो रही है। इधर, केंद्र सरकार ने एससी/एसटी एक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की तरफ से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय पुनर्विचार याचिका दायर करते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताएगा कि सीधे गिरफ्तारी पर रोक का निर्णय उस कानून को हल्का कर देगा, जिसका उद्देश्य अधिकार विहीन वर्ग को सुरक्षा देना है। मंत्रालय अपनी याचिका में आग्रह करेगा कि ताजा निर्णय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम-1989 के भय को खत्म करेगा, जिससे दलित हिंसा की घटनाएं बढ़ सकती हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही

एससी/ एसटी एक्ट को निष्प्रभावी करने के विरोध में -सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए आगे आएं युवा

भारत का अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति युगों-युगों से अश्पृश्यता,भेदभाव,निर्योग्यता, शोषण,उत्पीड़न एवं वंचना का शिकार रहा है । दुनिया में विश्व शान्ति का संदेश देने वाले तथागत गौतम बुद्ध,समतामूलक समाज निर्माण के पक्षधर , संत कबीर,संत रैदास,संत गाडगे द्वारा जनजागरण के माध्यम से जाति-प्रथा उन्मूलन,भेदभाव के समाप्ति पर बल दिया गया है। पेरियार रामास्वामी नायकर,ज्योतिबा राव फूले,बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर जैसे क्रांतिकारी महापुरुषों की प्रेरणा से स्फूर्त जन आंदोलन के फलस्वरूप अनुसूचित जाति/ जनजाति में लोकतांत्रिक चेतना का संचार हुआ। लेकिन आज SC/ST/OBC वर्गों के कानूनों पर ब्राह्मणवादी ताकतों ने चौतरफा हमला बोल रखा है।ये अन्ययायकारी ब्राह्मणवादी ताकतें पदोन्नति में आरक्षण को जड़ से ही खत्म कर दिया है और अब अनुसूचित जाति/ जनजाति के लिए बने कानून SC/ST एक्ट को निष्प्रभावी कर दिया गया है एक तरह से कहें तो खत्म ही कर दिया है। अब अगर SC/ST के किसी भी व्यक्ति पर कोई अन्याय होता है तो उस पर सीधे FIR नही हो सकेगी,मुकदमा दर्ज नही हो सकेगा बल्कि महीनों और सालों लग जाएंगे जांच होने में और तब भी जज के