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साली ने जीजा को प्रेम-प्रसंग में फंसाकर पहले बहन का घर उजाड़ा, फिर नजदीकियां बढ़ा हत्या की

बूंदी। कांस्टेबल की रिश्ते में साली और उसके दोस्त ने ही हत्या के बाद शव बौंली कस्बे में पुराने महल के पास जमीन में गाड़ दिया था। चार महीने से लापता बूंदी पुलिस के कांस्टेबल अभिषेक शर्मा का सड़ा-गला शव सवाई माधोपुर जिले के बौंली से बरामद कर लिया गया। परिवार ने तलाशने के बाद 5 सितंबर को कोतवाली में अभिषेक की गुमशुदगी की रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में अभिषेक के ससुराल पक्ष व उसकी प्रेमिका श्यामा पर अभिषेक को गायब करने का संदेह जताया गया था। श्यामा सालभर पहले 20 दिन तक बूंदी में उनके पास रहकर गई थी। जहां अभिषेक के साथ उसकी नजदीकियां बढ़ गई। बूंदी शहर के बीबनवा रोड निवासी कांस्टेबल अभिषेक शर्मा (30) 11 साल पहले पुलिस में लगा था। वह पुलिस लाइन में तैनात था। 28 अगस्त को घर से ड्यूटी पर जाने के लिए निकला था, पर न ड्यूटी पहुंचा, न घर लौटा। पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के बाद युवती से पूछताछ की तो उसने अपने साथी नवेद के साथ मिलकर अभिषेक की हत्या की बात कबूली। इस पर पुलिस ने दोनों को बुधवार को गिरफ्तार कर निशानदेही पर शव निकलवाया, जो कंकाल की शक्ल ले चुका था। शव करीब 110 दिन पुराना बताया जा रहा है। पूछताछ म

प्रधानमंत्री मोदी कहते है देश में जाति नहीं होगी - देखियें मोदी जी देश में मनुवादी ताकतों ने जाति के आधार पर ही डॉ पायल तडवी की हत्या कर दी -

# डॉ पायल तडवी                " मरो नहीं लड़ो - भागो नहीं, मुक़ाबला करो "   # रोहित वेमुला  के बाद अब  # डॉ पायल_तड़वी # जातिवादियों  का शिकार [caption id="attachment_9754" align="alignright" width="492"] डॉ पायल तडवी[/caption] महाराष्ट्र  | अपने तीन सीनियर डॉ हेमा आहूजा, डॉ भक्ति मेहर, डॉ अंकिता खंडिलवाल के जातिवाद " तानो से परेशां परेशान " डॉ पायल तड़वी " ने मृत्यु को गले लगाया , वह मुंबई स्थित बीवाईएल नायर हॉस्पिटल से गायनेकोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही थी वे महाराष्ट्र के जलगांव की रहने वाली थी ,विदित हो कि यह तीनों डॉक्टर अस्पताल के सैकंड ईयर की पीजी छात्रा को उसकी जातिसूचक फब्तियां कसते थे, जिसके चलते 26 वर्षीय महिला डॉक्टर ने मौत को गले लगा लिया । डॉ. पायल ने अपने तीनों सीनियर्स डॉक्टर के खिलाफ पहले अस्पताल प्रबंधन से शिकायत भी की थी, प्रबंधन की ओर से उचित कार्रवाई न होने पर वह काफी निराश थी। पहले तो पुलिस ने इसे जातिवादी केस मानने से इंकार कर दिया , डॉक्टर पायल के आत्महत्या करने के बाद उसके परिजनों ने भी उसकी डेड बॉडी लेने