Skip to main content

Posts

Showing posts with the label kapil gotam

एससी/ एसटी एक्ट को निष्प्रभावी करने के विरोध में -सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए आगे आएं युवा

भारत का अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति युगों-युगों से अश्पृश्यता,भेदभाव,निर्योग्यता, शोषण,उत्पीड़न एवं वंचना का शिकार रहा है । दुनिया में विश्व शान्ति का संदेश देने वाले तथागत गौतम बुद्ध,समतामूलक समाज निर्माण के पक्षधर , संत कबीर,संत रैदास,संत गाडगे द्वारा जनजागरण के माध्यम से जाति-प्रथा उन्मूलन,भेदभाव के समाप्ति पर बल दिया गया है। पेरियार रामास्वामी नायकर,ज्योतिबा राव फूले,बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर जैसे क्रांतिकारी महापुरुषों की प्रेरणा से स्फूर्त जन आंदोलन के फलस्वरूप अनुसूचित जाति/ जनजाति में लोकतांत्रिक चेतना का संचार हुआ। लेकिन आज SC/ST/OBC वर्गों के कानूनों पर ब्राह्मणवादी ताकतों ने चौतरफा हमला बोल रखा है।ये अन्ययायकारी ब्राह्मणवादी ताकतें पदोन्नति में आरक्षण को जड़ से ही खत्म कर दिया है और अब अनुसूचित जाति/ जनजाति के लिए बने कानून SC/ST एक्ट को निष्प्रभावी कर दिया गया है एक तरह से कहें तो खत्म ही कर दिया है। अब अगर SC/ST के किसी भी व्यक्ति पर कोई अन्याय होता है तो उस पर सीधे FIR नही हो सकेगी,मुकदमा दर्ज नही हो सकेगा बल्कि महीनों और सालों लग जाएंगे जांच होने में और तब भी जज के

बाबा साहेब द्वारा बनाया गया "भारतीय सविंधान" भारत को सदियों तक ऊर्जावान रखेगा- कपिल गौतम प्रेम

  सविंधान दिवस विशेष - बाबा साहेब द्वारा बनाया गया सविंधान सदियों तक भारत को ऊर्जावान बनाये रखेगा- कपिल गौतम प्रेम सविंधान महज एक औपचारिकता नही है यह एक समाज,एक गांव,एक देश सभी को ध्यान में रखकर और सभी अंगों से मिलकर बना है। 26 नवंबर 1949 को बाबा साहेब डॉ०आंबेडकर ने सविंधान को प्रस्तुत किया और अंगीकार कर भारत के लोगों को सौंप दिया गया।सविंधान दिवस पर अगर डॉ०आंबेडकर को याद ना किया जाए तो यह एकदम अधूरा है आइये एक नजर डालते हैं हम कैसे बने इस सविंधान के अंग-भारतीय राजनीति व समाज के ऐतिहासिक परिदृश्य में, डॉ. भीमराव अंबेडकर का उदय एक ऐसे जननेता के रूप में हुआ जिसने व्यक्तिगत संघर्ष की बुनियाद पर अपना सारा जीवन समाज की मुख्यधारा से विमुख, जीवन-यापन कर रहे, वंचितों, शोषितों, पीड़ितों के हक की लड़ाई में समर्पित कर दिया। समग्र विकास की उनकी यह विचारधारा (दृष्टिकोण) संविधान निर्माण के दौरान भी परिलक्षित हुई, जो समानता व सर्वकल्याण की वैचारिकी पर केंद्रित है। तत्कालीन परिस्थिति में संविधान का निर्माण निश्चय ही एक दुरुह कार्य था। ऐसे मुश्किल वक्त में बाबा साहेब ने बड़े ही धीरज के साथ प्रारूप समि