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उत्‍तर भारत लगातार शीत लहर की चपेट में, दिल्‍ली में आज न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री

दिल्ली। जम्‍मू-कश्‍मीर में ताजा बर्फबारी और बारिश के बाद कश्‍मीर घाटी में इस सप्‍ताह भी शीत लहर जारी है। समूची घाटी में न्‍यूनतम तापमान जमाव बिंदु से कई डिग्री नीचे बना हुआ है। समूचा उत्तर भारत शीत लहर की चपेट में है। हिमाचल प्रदेश में मौसम विभाग ने अगले दो दिन में भारी वर्षा और बर्फबारी का अनुमान व्यक्त किया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में आज न्यूनतम तापमान 6 दशमलव 4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बता दें कि श्रीनगर में कल रात तापमान शून्‍य से दो दशमलव छह डिग्री नीचे दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने अगले बृहस्‍पतिवार तक मौसम शुष्‍क रहने और हल्‍की वर्षा या बर्फबारी का अनुमान व्‍यक्‍त किया है। लद्दाख क्षेत्र में अगले 24 घंटे में कुछेक स्‍थानों पर हल्‍की बर्फबारी की संभावना है। राष्ट्रीय राजधानी में मौसम का सबसे ठंडा दिन रिकॉर्ड किया गया। यहां न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि औसत से तीन डिग्री कम है। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है जो सामान्य से सात डिग्री कम है।

दिल्ली में कड़ाके की ठंड, पिछले 22 सालों का रेकॉर्ड टूटा

दिल्ली। मंगलवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 12.2 डिग्री रहा। 1992 से अब तक यह दूसरा मौका है, जब दिसंबर में राजधानी का तापमान इतना नीचे गया है। दिल्ली की सर्दी ने इस बार दिसंबर में ही 22 सालों का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच सिर्फ 2.2 डिग्री अंतर का ही रहा। बता दें कि मंगलवार को नजफगढ़ दिल्ली में दिन के समय सबसे अधिक ठंडा रहा। राजधानी का तापमान फिलहाल कई पहाड़ी शहरों से भी कम दर्ज किया गया है अधिकतम तापमान 11 डिग्री हो गया है। मौसम विभाग ने और तापमान में गिरावट की संभावना व्यक्त की है। मौसम विभाग के अनुसार, इससे पहले 28 दिसंबर 1997 को राजधानी का तापमान 11.3 डिग्री रहा था, जो सबसे कम है। 1992 से अब तक यह दूसरा मौका है, जब दिसंबर में राजधानी का तापमान इतना नीचे गया है। राजधानी दिल्ली से शीतलहर का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। हाड़तोड़ ठंड के आगे लोग अब लाचार नजर आ रहे हैं। अधिकतम तापमान पिछले 22 सालों में इतना नीचे कभी नहीं आया, जबकि 27 सालों का यह दूसरा सबसे कम तापमान रहा है। पिछले 24 घंटों से सूर्य की हल्की सी रोशनी तक दिल्ली-एनसीआर में नहीं पहुंची है। बुधवार को भी

बिगड़े हालात को देखते हुए अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए जारी की चेतावनी

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पूर्वोत्तर में बिगड़े हालात को देखते हुए अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, इजरायल, सिंगापुर और कनाडा समेत कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श जारी किया है। कनाडा ने अपने नागरिकों को विरोध के कारण अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड की गैर-आवश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है. वहीं, सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने पूर्वोत्तर भारत के लिए एक यात्रा नोटिस जारी किया, जिसमें सिंगापुर के लोगों को सतर्कता और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है पूर्वोत्तर में बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है जबकि कई लोग घायल हुए हैं. कई इलाकों में कर्फ्यू लगाने के साथ इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर पाबंदी लगा दी गई है। इजरायल ने अपने नागरिकों के लिए परामर्श जारी करते हुए उन्हें असम और पूर्वोत्तर भारत के अन्य राज्यों में यात्रा न करने को कहा है। प्रदर्शनकारी नागरिकता (संशोधन) कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस कानून के तहत 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, पारसी,

एससी-एसटी आरक्षण बिल राज्यसभा में पारित, बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस को बताया दलित विरोधी

दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती ने उच्च सदन में बिल पारित करने के दौरान बाधा डालने के लिए कांग्रेस पार्टी को लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ये हरकत दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। आपको बता दें कि एससी-एसटी आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाने वाला 126वां संशोधन बिल गुरुवार को राज्यसभा से पास हो गया। साथ ही एंग्लो इंडियन कोटे से होने वाली सांसद की 2 सीटों को भी खत्म करने का प्रावधान है। बता दें कि संविधान के 126वें संशोधन बिल में एससी-एसटी आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाने की व्यवस्था है, जिसके राज्यसभा में पारित होने में कांग्रेस ने बाधा डालने की कोशिश की। हालाँकि सभापति की आग्रह पर वे सदन में वापस आए और तब विलम्ब से यह बिल पास हो पाया। मायावती ने ट्वीट किया, ‘संविधान के 126वें संशोधन बिल में एससी-एसटी आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाने की व्यवस्था है, जिसके राज्यसभा में पारित होने में बाधा डालकर कांग्रेस ने अपनी दलित विरोधी सोच का परिचय दिया है। बता दें कि आरक्षण को आर्टिकल 334 में शामिल किया गया है। बिल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को 10 साल तक बढ़ाने का प्रावधान है. एंग्लो-इंडियन

Citizenship Amendment Bill: पूर्वोत्तर में भारी विरोध, शरणार्थी मुसलमानों को नज़रअंदाज़ क्यों किया गया?

उर्दू की वरिष्ठ पत्रकार और लेखक शिरीन दलवी ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में महाराष्ट्र राज्य उर्दू साहित्य अकादमी की ओर से मिला सम्मान लौटा दिया है। दिल्ली। नागरिकता संशोधन विधेयक में उन मुसलमानों को नागरिकता देने के दायरे से बाहर रखा गया है जो भारत में शरण लेना चाहते हैं। इस प्रकार भेदभावपूर्ण होने के कारण इसकी आलोचना की जा रही है और इसे भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को बदलने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है। अभी तक किसी को उनके धर्म के आधार पर भारतीय नागरिकता देने से मना नहीं किया गया है। नार्थ ईस्ट के राज्यों में इस बिल का सख्त विरोध हो रहा है, वहां के लोगों का मानना है कि बांग्लादेश से ज़्यादातर हिंदू आकर असम, अरुणाचल, मणिपुर जैसे राज्यों में बसे हैं जिससे इन राज्यों का समाजी माहौल बिगड़ रहा है। ये अधिनियम देश को धर्म की बुनियाद पर बांटने का काम करेगा जो कि बराबरी के क़ानून के ख़िलाफ़ है। बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को जो गै़रक़ानूनी तरीक़े से भारत म

राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, नागरिक संशोधन बिल-2019 को लेकर क्‍यों सुलग रहा उत्‍तर-पूर्व

दिल्ली। भारतीय नागरिकता बिल में केंद्र सरकार का प्रस्तावित संशोधन लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत से पारित हो गया था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 को मंजूरी दे दी है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार यह कानून कल राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ लागू हो गया है। आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा गया है, जिससे नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा। नागरिकता बिल में इस संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा। सरकार ने कहा है कि घुसपैठियों और शरणार्थियों के बीच अंतर किया जाना आवश्‍यक है। यह कानून किसी के भी खिलाफ भेदभाव नहीं बरतता है और न ही किसी का अधिकार छीनता है। नागरिकता संशोधन विधेयक के दायरे से बाहर वाले क्षेत्र में दो श्रेणियां हैं जिन्हें इस विधेयक से दूर रखा गया है, इनर लाइन’ द्वारा संरक्षित राज्य और संविधान की छठी अनुसूची के तहत आने व

सुप्रीम कोर्ट: अयोध्या मामले की सुनवाई आज, 18 समीक्षा अर्जियों पर होगा फैसला

दिल्ली। सु्प्रीम कोर्ट के पांच जजों ने बितें दिनों अयोध्या  की विवादित भूमि का  2.77 एकड़ भूमि पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया था। न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड की गयी कार्यसूची के अनुसार संविधान पीठ चैंबर में कुल 18 पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करेगी। इनमें से नौ याचिकायें तो इस मामले के नौ पक्षकारों की हैं जबकि शेष पुनर्विचार याचिकायें 'तीसरे पक्ष ने दायर की हैं। आपको बता दें कि  अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में उच्चतम न्यायालय के नौ नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार के लिये दायर याचिकाओं पर शीर्ष अदालत बृहस्पतिवार (12 दिसंबर) को चैंबर में विचार करेगी। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ इन पुनर्विचार याचिकाओं पर चैंबर में विचार करेगी। बता दें कि  यह फैसला सुनाने वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई चूंकि अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उनके स्थान पर संविधान पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को शामिल किया गया है। इस मामले में सबसे पहले दो दिसंबर को पहली पुनर्विचार याचिका मूल वादी एम सिदि्दक के

CM पद को लेकर अशोक गहलोत ने दिया ये बयान, कहा...

जोधपुर। कांग्रेस के नवनियुक्त संगठन महासचिव और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश में हुए उपचुनाव में सब नेताओं ने मिलकर कांग्रेस को जीत दिलाई थी वैसा ही प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी होगा। कांग्रेस एक जुट होकर विधानसभा चुनाव लड़ेगी। मीडिया से चर्चा के दौरान गहलोत से पूछा गया कि क्या आपको केंद्र की जिम्मेदारी देकर राजस्थान में सचिन पायलट को फ्री हैंड दे दिया गया? गहलोत ने कहा राजस्था का हर गांव ढाणी में दिल में है। मैं पांच साल तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का महामंत्री रहने से पहले भी दिल्ली में रहा लेकिन वापस राजस्थान का मुख्यमंत्री लौटा था। मैं जब भी राजनीति से रिटायर्ड हो जाउंगा तब जोधपूर ही आकर रहूंगा।   गहलोत ने कहा कि कांग्रेस आलाकमान ने मेरे पर विश्वास करके जो जिम्मेदारी दी है मैं उसे पूरी तरह निभाने की कोशिश करूंगा। हम आने वाली नई पीढ़ी को कांग्रेस से जोड़ेंगे। आज नई पीढ़ी और कांग्रेस के बीच में थोड़ी दूरी आ गई है। नई पीढ़ी के लोगों को कांग्रेस के बलिदानों के बारे में जानकारी नही है। जबकि बीजेपी अब 70 साल बाद गांधी व पटेल को अपना रही है।

BJP को लेकर सचिन पायलट ने दिया ये बड़ा बयान, कहा...

अजमेर। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अजमेर और अलवर की लगातार चार साल तक अनदेखी की। उपचुनाव की घोषणा के बाद जब सीएम को रिपोर्ट मिली कि वे यहां से बुरी तरह हार रही हैं तो उन्होंने लगातार दाैरे किए और घोषणाएं की। जब सरकार का 8-9 माह का कार्यकाल ही रहा है तो इन घोषणाओं का औचित्य क्या रह गया है? जनता सब जान चुकी है, वह इन उपचुनाव में बता देगी, यह उपचुनाव जयपुर ही नहीं, दिल्ली तक के सिंहासन को हिला देगी। पायलट मंगलवार शाम अजमेर में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह उपचुनाव प्रदेश और देश की राजनीति में अति महत्वपूर्ण हो गया है। तीनों उपचुनाव में 17 विधानसभा क्षेत्रों में जनता किस करवट बैठने वाली है, इस पर सभी की नजर रहेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास अपना कुछ दिखाने के लिए नहीं है। चार साल में राजीव गांधी केंद्र का नाम अटल सेवा केंद्र कर दिया, कांग्रेस के जितने भी प्रोजेक्ट्स हैं, उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना का हश्र भी बुरा कर दिया है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच अनबन का खामियाजा जनता भुगत रही ह

अस्थिर कांग्रेस को अब राहुल गाँधी का साहरा -

राहुल गाँधी का कांग्रेस पार्टी का राष्टीय अध्यक्ष बनना तय -  राष्टीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए आज राहुल गाँधी पार्टी मुख्यालय पहुँचे कांग्रेस के कई वरिष्ट नेता ओ की उपस्थिति में अपना नामांकन का प्रथम आवेदन किया |  इस अवसर पर अशोक गहलोत ,अहमद पटेल ,तरूण गोगोई ,शीला दीक्षित,आदी राहुल गाँधी  के प्रस्तावक बने | इस दौरान वर्तमान राष्टीय कांग्रेस की  अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता उनके साथ उपस्थित रहे | कांग्रेस अध्यक्ष बनने की कवायद में राहुल गाँधी मात्र  इकलौते उम्मीदवार है  क्योंकि सोमवार को नामांकन का आखिरी दिन है और किसी ने भी अभी तक किसी भी अन्य उमीदवार ने अध्यक्ष पद के लिए  कोई पर्चा नहीं भरा है। नये कांग्रेस अध्यक्ष की घोषणा संभवत: 5 दिसंबर amzn_assoc_ad_type ="responsive_search_widget"; amzn_assoc_tracking_id ="politico24x7-21"; amzn_assoc_marketplace ="amazon"; amzn_assoc_region ="IN"; amzn_assoc_placement =""; amzn_assoc_search_type = "search_widget";amzn_assoc_width ="