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अन्न देवता की, जनता के नाम पुकार 6000 हजार बच्चे, भारत में रोज कुपोषण के शिकार ............

खाद्यान्न बर्बादी में हम दुनियां में 7 वें नम्बर पर है। जितना अनाज ब्रिटेन साल भर में उत्पादन करता है, उतना हम बर्बाद कर देते है। जब से सृष्टि पर मानव जीव की उत्पति हुई, उसी समय से मै मानव की जटरागनी (भूख) को शांत  करने का काम करता आ रहा हूॅ। मुझे लोग सम्मान व श्रद्वा से अन्न देवता के नाम से जानते है। मानव सभ्यता जब अस्तीत्व में आई, लोग नदियों के किनारे रह कर कबीलों में रहने लगे, कई सभ्यताओं का विकास व पतन हुआ, देश दुनियां में प्लेग, महामारी, छपन्या का अकाल भी पडा, जब लोग अन्न देवता के दर्शन  के लिए तडपने लगे थे , लोग अन्न के बिना देष दुनियां में लाखों की तादात में लोग मृत्यु के गाल में समा गये थे, अन्र्तराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर विश्व  युद्व लडे गये कबीलों के बाद में हृुण, कुषाण, द्रवीड, मुगल, अंग्रेज  आकर चले गये लेकिन मेरा महत्व पाषाण काल से लेकर आधुनिक काल तक किसी प्रकार से कम नहीं हुआ । मै गरीब, अमीर, महिला, पुरूष, रंग-भेद, जाति वर्ग धर्म, क्षेत्र बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए समान रूप से उपयोगी रहा हूॅ। लाचार, गरीब लोग मुझे अन्न देवता के नाम से मेरे नाम की भीख मांग कर अपनी भ