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राजस्थान के टिकट दिल्ली में हो रहे है फ़ाइनल - क्या है गणित

बीजेपी में दिल्ली में शुरू हुआ टिकटों के लिए सेमीफाइनल मैराथन मंथन - विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों में प्रत्याशी चयन का केन्द्र अब दिल्ली हो गया है. कांग्रेस के बाद अब सीएम वसुंधरा राजे और बीजेपी के बड़े नेता भी शनिवार को सुबह दिल्ली पहुंच गए हैं. दिल्ली में आज राजस्थान के चुनाव प्रभारी केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के आवास पर टिकटों के लिए सेमीफाइनल मैराथन मंथन शुरू हो गया है | जावड़ेकर के आवास पर सीएम राजे, प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना, प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी, वी सतीश, और राजेन्द्र राठौड़ समेत अन्य बड़े नेता मौजूद हैं. यहां पार्टी की कोर कमेटी प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी चयन को लेकर मंथन में जुटी है. जावड़ेकर के आवास पर मंथन के बाद सीएम राजे की राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ भी चर्चा होने की संभावना है. कल होनी है सेन्ट्रल इलेक्शन कमेटी की बैठक. उसके बाद रविवार को बीजेपी सेन्ट्रल इलेक्शन कमेटी की बैठक होनी है. उस बैठक में प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम रूप से मुहर लगेगी. उसके बाद रविवार देर रात या फिर सोमवार को बीजेपी की पहली

जाटों को कुछ सीटें त्याग कर सियासी मैदान में बङा दिल दिखाना होगा - जाने ख़ास

जाट ...........सियासत ...... एक नज़र - जाटों को राजस्थान की करीब एक चौथाई विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारी का दावा करने की बजाए अपनी जीती हुई कुछ सीटों का भी त्याग करना चाहिए, ताकि सियासी सन्तुलन स्थापित हो सके और अन्य जातियों की जाटों के प्रति नाराजगी भी कम हो सके। ------------------------------------------------------------ इन सीटों में मण्डावा, झुन्झुनूं, गुढा उदयपुरवाटी, फतेहपुर, लाडनूं , नागौर, भादरा, चूरू, मकराना, आमेर, फलौदी आदि दो दर्जन सीटें प्रमुख हैं, जहाँ से या तो वर्तमान में जाट विधायक हैं या फिर कुछ मजबूत जाट नेता प्रमुख पार्टियों से दावेदार बने हुए हैं। ------------------------------------------------------------ जाट कौम के बुद्धिजीवियों और राजनेताओं को इन जाट दावेदारों को समझाना चाहिए कि आप इन सीटों से दावेदारी छोङ कर दूसरी कौमों के दावेदारों का समर्थन करें तथा उन्हें टिकट दिलवाने व चुनाव जीताने में सहयोग भी करें। जयपुर | जाट कौम राजस्थान का एक प्रमुख समुदाय है, जो आजादी से पहले तक सामन्तों के हाथों जबरदस्त शोषण व प्रताड़ना का शिकार हुई थी। जाटों का मुख्य पेशा खेती किसानी था,