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ज़ेल जा सकते है आप नेता कुमार विश्वास -

यूपी के बुलंदशहर में कुमार विश्वास उर्फ मनीष शर्मा पर बाबा साहब पर टिप्पणी करने पर हुआ मुकदमा दर्ज- आप नेता कुमार विश्वास उर्फ मनीष शर्मा ने सविंधान निर्माता, भारत रत्न बाबा साहेब डॉ०भीमराव अंबेडकर जी पर आपत्ति जनक व जाति सूचक टिप्पणी कर बुरे फ़स गए है | राजस्थान में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कुमार विश्वास ने कहा था की   "एक आदमी आरक्षण के नाम पर आंदोलन कर गया था एक आदमी (अम्बेडकर) यहाँ  आकर जाति का बीज बो गया था । उससे पहले यहां जाति वाद नहीं था । सब मिलकर रहते थे ।  आप नेता कुमार विश्वास ने कहा मेरे गाँव में  एक मेहतरानी मेरी दादी के साथ ब्याह कर साथ आई थी  वह मेहतरानी हमारे घर की बहू को घूंघट न करने पर हजार गालियां सुनाकर चली जाती थी और हम उसे कुछ नहीं कहते थे । यानी इतनी इज्जत थी उसकी। " कुमार विश्वास की कही हुई बातो से सम्पूर्ण दलित समुदाय और विभिन्न सामाजिक संघटनो ने आपत्ति दर्ज कराई है | उ नका का कहना है की आप नेता कुमार विश्वास सस्ती लोकप्रियता के लिए डॉ बाबा  साहब जैसे महापुरुष पर ऐसे अपशब्द का प्रयोग कर गठिया राजनीती  कर रहे है आज बुलंदशहर में कुमार विश्वास उ

बाबा साहेब द्वारा बनाया गया "भारतीय सविंधान" भारत को सदियों तक ऊर्जावान रखेगा- कपिल गौतम प्रेम

  सविंधान दिवस विशेष - बाबा साहेब द्वारा बनाया गया सविंधान सदियों तक भारत को ऊर्जावान बनाये रखेगा- कपिल गौतम प्रेम सविंधान महज एक औपचारिकता नही है यह एक समाज,एक गांव,एक देश सभी को ध्यान में रखकर और सभी अंगों से मिलकर बना है। 26 नवंबर 1949 को बाबा साहेब डॉ०आंबेडकर ने सविंधान को प्रस्तुत किया और अंगीकार कर भारत के लोगों को सौंप दिया गया।सविंधान दिवस पर अगर डॉ०आंबेडकर को याद ना किया जाए तो यह एकदम अधूरा है आइये एक नजर डालते हैं हम कैसे बने इस सविंधान के अंग-भारतीय राजनीति व समाज के ऐतिहासिक परिदृश्य में, डॉ. भीमराव अंबेडकर का उदय एक ऐसे जननेता के रूप में हुआ जिसने व्यक्तिगत संघर्ष की बुनियाद पर अपना सारा जीवन समाज की मुख्यधारा से विमुख, जीवन-यापन कर रहे, वंचितों, शोषितों, पीड़ितों के हक की लड़ाई में समर्पित कर दिया। समग्र विकास की उनकी यह विचारधारा (दृष्टिकोण) संविधान निर्माण के दौरान भी परिलक्षित हुई, जो समानता व सर्वकल्याण की वैचारिकी पर केंद्रित है। तत्कालीन परिस्थिति में संविधान का निर्माण निश्चय ही एक दुरुह कार्य था। ऐसे मुश्किल वक्त में बाबा साहेब ने बड़े ही धीरज के साथ प्रारूप समि