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जयपुर में धारा 144 लागू -

जयपुर में धारा 144 लागू -इंटरनेट सेवा बंद -  जयपुर | 2 अप्रैल को दलित समाज ने  अपने अधिकारों के लिए जहाँ अपना विरोध - प्रदर्शन किया था उसके प्रतिरोध के लिए कल 10 अप्रैल को स्वर्ण जातियों ने भारत बंद का ऐलान कर दिया है | भारत बंद को लेकर सभी स्वर्ण जातियों सोशल मिडिया पर लम्बे समय से विरोध जता रही है  करनी सेना ने भी विद्याधर नगर में स्थित भेरूसिंह शेखावत स्मति स्थल पर धरना दे रहे थे जिन को पुलिस धारा 144 के तहत गिरफ्तारी किया था | सोशल मिडिया पर इस बार स्वर्ण जातियों द्वारा 10 अप्रेल को वायरल भारत बंद आह्रन के मद्देनजर जयपुर में इंटरनेट सेवाएं आज रात 12 बजे से बंद कर दी गई है    | खास नज़र - पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल ने बताया कि शहर में 1 दिन के लिए रैली, धरने और प्रदर्शन पर रोक रहेगी। धारा 144 को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसके अलावा पुलिस की ओर से हेल्पलाईन दो हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। आमजन को कल किसी तरह की परेशानी होती है तो वे पुलिस को 100 नंबर पर फोन कर सकते है।  संजय अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने कल के भारत बंद को सोशल मीडिया की उपज बताया जिसके चलते कल सोशल मी

SC/ST एक्ट में संशोधन के खिलाफ जयपुर में प्रदर्शन

जयपुर। राजस्थान में एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ मीन सेना, युवा जाट महासभा, भीम आर्मी और भीम सेना आदि कई संगठन भारत बंद के आह्वान पर सडक़ों पर उतर आएं है। एससी/एसटी एक्ट पर उच्चतम न्यायालय के ताजा फैसले के बाद दलित संगठनों के भारत बंद के आह्वान पर सोमवार को राजस्थाान में भी प्रदर्शन और रैलियां निकाली जा रही हैं। इस दौरान कई स्थानों पर तोडफ़ोड़ और संघर्ष की खबरें भी मिल रही हैं।राजस्थान राजधानी जयपुर के महेश नगर थाना इलाके में दुकानों में तोडफ़ोड़ के बाद पत्थर फेंके जाने की घटना सामने आई है। इसे लेकर व्यापारियों में खासा रोष है। वहीं पुलिस भी मौके पर पहुंच चुकी है लेकिन भीड़ के आगे बेबस नजर आ रही है। भारत बंद के आह्वान पर कालाडेरा में दुकान बंद कराने को लेकर विवाद हो गया। यहां दुकान बंद कराने गए लोगों का व्यापारियों ने विरोध किया तो भीड़ तोडफ़ोड़ पर उतारु हो गई। इस दौरान दो दुकानों में तोडफ़ोड़ के बाद तनाव पैदा हो गया दलित वर्ग उतरे सडक़ों पर जयपुर, भरतपुर, अजमेर, धौलपुर, सवाईमाधोपुर, करौली सहित राज्य में बसपा और अन्य राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के साथ दलित ने बंद का आह्वान किया है। दलि

मोदी सरकार झुकी - दलित आंदोलन तेज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एससी/एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। देश भर में दलित संगठनों ने इस फैसले के विरोध में बंद का आयोजन किया है। शीर्ष अदालत के फैसले पर दलित संगठनों की नाराजगी को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऐलान किया था कि वह इस मसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। ये विरोध अब हिंसात्मक रूप लेता जा रहा है। देश में कई जगहों पर तोड़फोड़, पथराव, गाड़ियां जलाना, दुकाने बंद करवाने जैसी घटनाएं हो रही है। इधर, केंद्र सरकार ने एससी/एसटी एक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की तरफ से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय पुनर्विचार याचिका दायर करते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताएगा कि सीधे गिरफ्तारी पर रोक का निर्णय उस कानून को हल्का कर देगा, जिसका उद्देश्य अधिकार विहीन वर्ग को सुरक्षा देना है। मंत्रालय अपनी याचिका में आग्रह करेगा कि ताजा निर्णय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम-1989 के भय को खत्म करेगा, जिससे दलित हिंसा की घटनाएं बढ़ सकती हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही

एससी/ एसटी एक्ट को निष्प्रभावी करने के विरोध में -सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए आगे आएं युवा

भारत का अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति युगों-युगों से अश्पृश्यता,भेदभाव,निर्योग्यता, शोषण,उत्पीड़न एवं वंचना का शिकार रहा है । दुनिया में विश्व शान्ति का संदेश देने वाले तथागत गौतम बुद्ध,समतामूलक समाज निर्माण के पक्षधर , संत कबीर,संत रैदास,संत गाडगे द्वारा जनजागरण के माध्यम से जाति-प्रथा उन्मूलन,भेदभाव के समाप्ति पर बल दिया गया है। पेरियार रामास्वामी नायकर,ज्योतिबा राव फूले,बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर जैसे क्रांतिकारी महापुरुषों की प्रेरणा से स्फूर्त जन आंदोलन के फलस्वरूप अनुसूचित जाति/ जनजाति में लोकतांत्रिक चेतना का संचार हुआ। लेकिन आज SC/ST/OBC वर्गों के कानूनों पर ब्राह्मणवादी ताकतों ने चौतरफा हमला बोल रखा है।ये अन्ययायकारी ब्राह्मणवादी ताकतें पदोन्नति में आरक्षण को जड़ से ही खत्म कर दिया है और अब अनुसूचित जाति/ जनजाति के लिए बने कानून SC/ST एक्ट को निष्प्रभावी कर दिया गया है एक तरह से कहें तो खत्म ही कर दिया है। अब अगर SC/ST के किसी भी व्यक्ति पर कोई अन्याय होता है तो उस पर सीधे FIR नही हो सकेगी,मुकदमा दर्ज नही हो सकेगा बल्कि महीनों और सालों लग जाएंगे जांच होने में और तब भी जज के