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पेयजल योजनाओं में राजनैतिक भेदभाव के आरोप निराधार : सुरेन्द्र गोयल

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी ने नोखा पेयजल योजना को निरस्त करने में राजनीतिक भेदभाव बरतने का आरोप लगाते हुये राज्य सरकार को जमकर घेरा। विधानसभा के प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक भंवर सिंह के बीकानेर जिले के गांवों को इंदिरा गांधी नहर से पेयजल की आपूर्ति किये जाने के सवाल पर पूरक प्रश्न करते हुये डूडी ने कहा कि राज्य सरकार ने राजनैतिक द्वेषता के कारण पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा स्वीकृत जलप्रदाय योजनाओं को निरस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को निरस्त की गयी इस योजना के कारणों के साथ ही पेयजल संकट से जूझ रही क्षेत्र की जनता के लिये वैकल्पिक व्यवस्था की भी जानकारी देनी चाहिये। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने पेयजल योजनाओं में राजनैतिक भेदभाव करने के आरोपों को निराधार बताते हुये कहा कि 99 करोड़ रुपए की नोखा पेयजल योजना को पूर्ववर्ती सरकार के समय लाया गया था।   इस कार्य के लिए निविदा दर 391.3 करोड़ रुपए आई, जो कि कार्य की राशि से 21.14 फीसदी अधिक थी। उन्होंने कहा कि नेगोसिएशन के बाद भी कार्य के लिए 9 प्रतिशत अधिक निविदा दर आई। उन्हों

प्रदेश में बढ़ती अपराध की घटनाओं लगाये अंकुश : गहलोत

उदयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि प्रदेश में बढ़ती अपराध की घटनाओं पर राज्य सरकार को अंकुश लगाने का प्रयास करना चाहिए। एक दिवसीय दौरे पर उदयपुर आए गहलोत ने आज यहां मीडिया से कहा कि राज्य में बढ़ते अपराध के ग्राफ की हद पार हो चुकी हैं। राज्य में आये दिन बलात्कार, डकैती, चोरी जैसी घटनाओं में बढोत्तरी हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सुना है गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के पास कोई अधिकार नहीं हैं। उनके पास कोई अधिकार नहीं हैं तो उनको अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिये। उन्होंने कहा कि राज्य में बढ़ती अपराध की घटनाओं से माहौल खराब हो रहा हैं। उदयपुर में वाल्मिकी समाज के लोगों द्वारा नगर निगम में भर्ती संबंध में दिये जा रहे धरने पर उन्होंने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी सरकार की लापरवाही का नमूना हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के चार वर्ष पूरे हो चुके है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा उदयपुर नगर निगम में सफाईकर्मियों की भर्ती की स्वीकृति की जा चुकी थी और इतना समय बीतने के बाद भी किन कारणों से भर्ती नहीं की जा रही हैं।

पद्मावत को लेकर गृहमंत्री कटारिया ने दिया ये बड़ा बयान, कहा...

जयपुर। राजस्थान के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि फिल्म पद्मावत पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का अध्ययन करने और विधि विशेषज्ञों से विचार विमर्श के बाद ही राज्य सरकार कोई कदम उठाएगी। गृहमंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार शीर्ष न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती है। निर्णय की प्रति मिलने के बाद सरकार उसका अध्ययन करेगी और विधि-विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद कदम उठाना होगा तो उठाएंगे। यदि विधि विशेषज्ञ आगे बढऩे की राय देंगे तो आगे बढ़ेंगे। फैसले पर उनकी व्यक्तिगत राय पूछने पर उन्होंने कहा कि जब तक फैसले का बारीकी से अध्ययन नहीं कर लेते और विधि विशेषज्ञों से विचार-विमर्श नहीं कर लेते, तब तक मैं कुछ नहीं कहना चाहता। गौरतलब है कि शीर्ष न्यायालय ने राजस्थान सहित सभी राज्यों में फिल्म को रिलीज करने को हरी झंडी दे दी है। राज्य सरकार ने इससे पहले फिल्म पद्मावत की रिलीज पर रोक लगा दी थी।

राज्य सरकार की लापरवाही के कारण प्रदेश के करीब 25 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार: गहलोत

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार की लापरवाही के कारण बजरी खनन से जुड़े लाखों मजदूर बेरोजगार हो गये और राज्य का विकास भी ठप हो रहा हैं। गहलोत ने आज अपने एक बयान में कहा कि उच्चत्तम न्यायालय ने बजरी माफियाओं के साथ सरकार की मिलीभगत को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए दो महीनो पूर्व रोक लगाई थी और सरकार से जवाब मांगा था। दो दिन पूर्व सरकार द्वारा प्रस्तुत जवाब पर न्यायालय ने फिर से अपनी नाराजगी दिखाते हुए रोक को डेढ़ माह के लिए और बढ़ा दिया है।   उन्होंने कहा कि सरकार की इस लापरवाही के कारण प्रदेश के करीब पच्चीस लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गये हैं जिनमें बजरी खनन में लगे मजदूर, बजरी ट्रक ड्राईवर, उनके मालिक, निर्माण मजदूर एवं कारीगर आदि शामिल हैं। इसके चलते लोगों के भवन निर्माण कार्य रुक गये हैं वहीं राजधानी जयपुर सहित प्रदेश में सरकार के सभी छोटे बड़े प्रोजेक्ट भी अटक गये हैं। उन्होंने कहा कि इसको लेकर आम जन में आक्रोश भी फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि नागौर और बीकानेर में खनन जारी हैं लेकिन इन क्षेत्रों से प्रदेश भर की मांग को पूरा करना