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बिगड़े हालात को देखते हुए अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए जारी की चेतावनी

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पूर्वोत्तर में बिगड़े हालात को देखते हुए अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, इजरायल, सिंगापुर और कनाडा समेत कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श जारी किया है। कनाडा ने अपने नागरिकों को विरोध के कारण अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड की गैर-आवश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है. वहीं, सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने पूर्वोत्तर भारत के लिए एक यात्रा नोटिस जारी किया, जिसमें सिंगापुर के लोगों को सतर्कता और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है पूर्वोत्तर में बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है जबकि कई लोग घायल हुए हैं. कई इलाकों में कर्फ्यू लगाने के साथ इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर पाबंदी लगा दी गई है। इजरायल ने अपने नागरिकों के लिए परामर्श जारी करते हुए उन्हें असम और पूर्वोत्तर भारत के अन्य राज्यों में यात्रा न करने को कहा है। प्रदर्शनकारी नागरिकता (संशोधन) कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस कानून के तहत 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, पारसी,

एससी-एसटी आरक्षण बिल राज्यसभा में पारित, बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस को बताया दलित विरोधी

दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती ने उच्च सदन में बिल पारित करने के दौरान बाधा डालने के लिए कांग्रेस पार्टी को लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ये हरकत दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। आपको बता दें कि एससी-एसटी आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाने वाला 126वां संशोधन बिल गुरुवार को राज्यसभा से पास हो गया। साथ ही एंग्लो इंडियन कोटे से होने वाली सांसद की 2 सीटों को भी खत्म करने का प्रावधान है। बता दें कि संविधान के 126वें संशोधन बिल में एससी-एसटी आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाने की व्यवस्था है, जिसके राज्यसभा में पारित होने में कांग्रेस ने बाधा डालने की कोशिश की। हालाँकि सभापति की आग्रह पर वे सदन में वापस आए और तब विलम्ब से यह बिल पास हो पाया। मायावती ने ट्वीट किया, ‘संविधान के 126वें संशोधन बिल में एससी-एसटी आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाने की व्यवस्था है, जिसके राज्यसभा में पारित होने में बाधा डालकर कांग्रेस ने अपनी दलित विरोधी सोच का परिचय दिया है। बता दें कि आरक्षण को आर्टिकल 334 में शामिल किया गया है। बिल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को 10 साल तक बढ़ाने का प्रावधान है. एंग्लो-इंडियन

Citizenship Amendment Bill: पूर्वोत्तर में भारी विरोध, शरणार्थी मुसलमानों को नज़रअंदाज़ क्यों किया गया?

उर्दू की वरिष्ठ पत्रकार और लेखक शिरीन दलवी ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में महाराष्ट्र राज्य उर्दू साहित्य अकादमी की ओर से मिला सम्मान लौटा दिया है। दिल्ली। नागरिकता संशोधन विधेयक में उन मुसलमानों को नागरिकता देने के दायरे से बाहर रखा गया है जो भारत में शरण लेना चाहते हैं। इस प्रकार भेदभावपूर्ण होने के कारण इसकी आलोचना की जा रही है और इसे भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को बदलने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है। अभी तक किसी को उनके धर्म के आधार पर भारतीय नागरिकता देने से मना नहीं किया गया है। नार्थ ईस्ट के राज्यों में इस बिल का सख्त विरोध हो रहा है, वहां के लोगों का मानना है कि बांग्लादेश से ज़्यादातर हिंदू आकर असम, अरुणाचल, मणिपुर जैसे राज्यों में बसे हैं जिससे इन राज्यों का समाजी माहौल बिगड़ रहा है। ये अधिनियम देश को धर्म की बुनियाद पर बांटने का काम करेगा जो कि बराबरी के क़ानून के ख़िलाफ़ है। बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को जो गै़रक़ानूनी तरीक़े से भारत म