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Showing posts with the label अभिव्यक्ति

आपका ज़मीर आख़िर जिन्दा क्यों है - 21 वीं सदीं में इंसान मलमूत्र में अपना मुहँ दे रहा है

Why is your conscience alive - in the 21st century man is giving his mouth in excreta राजस्थान . जयपुर | भारत देश आज परमाणु सम्पन्न है और विश्व पटल पर अपनी एक साख रखता है लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी कुछ ऐसे अमानवीय द्रश्य हमारी आखों के सामने आ जाते है की हम अपने आप से ही कई सवाल कर बैठते थे आख़िर ऐसा क्यों - आज़ादी के 70 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी हमारे समाज के कर्णधार समाज " वाल्मीकि " जिन्हें अलग - अलग राज्यों में अलग -अलग नाम से जानते है जैसे राजस्थान में में वाल्मीकि .भंगी .मेहतर .झडमाली . हलालखोर . चुह्दा ,राउत ,हेमा . डोम .डोमर .हाड़ी ,लालबेग आदी तमाम नाम लेकिन इनका काम सिर्फ - सफाई करना है चाहे रोड पर हो या गटर - सीवरेज | आज़ादी के बाद इस वंचित समाज को क्या मिला - भारत देश 15 अगस्त 1947 में आज़ाद हो गया देश की सत्ता अब देश के नेताओं के पास आ गई देश के पहले प्रधानमंत्री बनने का गौरव पंडित जवाहर लाल नेहरु को मिला ,उनका पहला देश को संबोधित करने वाला भाषाण एक विजनरी था जिसकी चर्चा आज भी होती है | देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी और 26 जनवरी 1950 को डॉ बाबा साहब अम्बेडकर क

क्या भारत में मोदी { पूंजीवाद } के खिलाफ़ - लाल सलाम { कार्ल मार्क्स & लेनिन } क्रांती की आहट शुरू हो चुकी है ,जानें यहाँ

Has the cry for Lal Salaam {Karl Marx & Lenin} revolution started against Modi {capitalism} in India, know here The basic lessons of Lenin are still the same, right and very important today - श्रमजीवी वर्ग के महान क्रांतिकारी नेता और शिक्षक, वी.आई. लेनिन रूस के मजदूर वर्ग और मेहनतकश जनसमुदाय को संगठित करके पूंजीपतियों का तख्तापलट करने, और मानव इतिहास में पहली बार मजदूरों और किसानों की हुकूमत स्थापित व मजबूत करने में बोल्शेविक पार्टी को अगुवाई दी। अपनी महत्पूर्ण सैद्धांतिक कृति “साम्राज्यवाद: पूंजीवाद का उच्चतम पड़ाव” में लेनिन ने दिखाया कि पूंजीवाद अपने अंतिम पड़ाव, साम्राज्यवाद या मरणासन्न पूंजीवाद, पर पहुंच गया है। दुनिया और भारत में सारी गतिविधियां वर्तमान युग को साम्राज्यवाद और श्रमजीवी क्रांति का युग बताने वाले लेनिन के विश्लेषण की ही पुष्टि करती हैं। साम्राज्यवाद दुनिया के सभी भागों पर अपना वर्चस्व जमाने के लिये पूरी कोशिश करेगा, खूनी विनाशकारी जंग भी छेड़ेगा, और मानवजाति को एक संकट से दूसरे संकट में धकेलता चला जायेगा, जब तक मजदूर वर्ग इस शोषण की व्यवस्था का तख्तापलट करने और समा

क्या असदुद्दीन ओवैसी देश में मुसलमानों के लियें उपयुक्त है - ओवैसी परिवार -इतिहास यहाँ जानें

ओवैसी मुल्क और मुसलमानों के लिए फायदेमंद हैं या नुकसानदेह  - --------------------------------------------- असदुद्दीन ओवैसी जो कि एमआईएम के सदर और हैदराबाद लोकसभा सीट से सांसद हैं। जिनको लेकर आजकल मुस्लिम कौम में जबरदस्त उत्साह है। काफी मुसलमान उन्हें अपना सियासी रहनुमा मान रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बहुत से लोग ख़ासकर तथाकथित सेक्यूलर पार्टियों से जुड़े हुए लोग उन्हें भाजपा को लाभ पहुंचाने वाला बता रहे हैं। इसी उत्साह और आरोप को मद्देनजर रखकर यह लेख तैयार किया गया है। इसे पूरा पढेंगे तभी समझ में आएगा कि ओवैसी साहब मुल्क और मुसलमानों के लिए फायदेमंद हैं या नुकसानदेह ? ****************************** जयपुर । ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहाद उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) जिसे मजलिस और एमआईएम भी कहा जाता है। जो कि एक सियासी पार्टी है। बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी इसके अध्यक्ष (सदर) हैं और वे हैदराबाद लोकसभा सीट से सांसद हैं। ओवैसी और इनकी पार्टी सियासी गलियारों में कुछ बरसों से चर्चा का विषय बनी हुई है। बेबाक और सटीक भाषण तथा संघ परिवार एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खरी खौटी सुनाने के मामले में ओवैसी मशहू

पत्रकार अपनी विश्वसनियता बनाए रखें - रोहिताश सैन

हिंदी पत्रकार दिवस समारोह - देहरादून । इंडियन मीडिया जर्नलिस्ट्स यूनियन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और  वरिष्ठ पत्रकार रोहिताश सैन ने कहा है कि आज के समय में पत्रकारों के सामने अपनी विश्वसनियता को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है और इस चुनौती का मुकाबला हम तभी कर सकेंगे जब हम अपने कार्य को पूजा समझ कर नहीं करेंगे। सैन ने यह बात गुरुवार को देहरादून जिले के डोईवाला विधानसभा मुख्यालय पर प्रगतिशील पत्रकार मंच द्वारा आयोजित हिंदी पत्रकार दिवस समारोह के मुख्य वक्ता के रूप में कही । उन्होंने वर्तमान समय में इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में पत्रकारिता पर विश्वसनीयता कम होने और आने वाले समय में इस चुनौती को दूर कर करने की बात कही । उन्होंने कहां की प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता आज भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की विश्वसनीयता के मुकाबले कहीं ज्यादा है । समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री के पूर्व सलाहकार व भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश सुमन ध्यानी ने कहा कि वही पत्रकार महान बनते हैं जो चुनौतियों से पार पाकर आगे बढ़ते हैं उन्होंने पत्रकारिता के इतिहास को उदाहरण देते हुए सरलता से समझाया और बताया कि पत्रकारिता आदिकाल से अन

मातृशक्ति के अधिकारों , सशक्तिकरण ,और सम्मान के लियें संघर्षो के साथ लड़ते रहेंगे - पवन देव

 उदेश्य / विचार – राजनीति में सकारात्मक , ज्वलंत मुद्दों – रोजगार .एट्रोसिटी. महिला सु रक्षा.सामाजिक रूप से समाज मे आपसी सौहार्द .राष्ट्रीय एकता. समानता बेहतर शिक्षा के लिये – युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना ।   PAWAN DEV  M - 7688827752 , 7976371944 MAIL - PAWANDEV024@GMAIL.COM पवन देव का जन्म 24 जनवरी 1989 को राजस्थान के जयपुर शहर में हुआ इनके पिता का नाम पूरण मल एवं माता का नाम देवकी देवी है | पवन देव का झुकाव बचपन से ही सामाजिक कार्यों व् समाज सेवा की ओर रहा , 16 वर्ष की उम्र से ही उन्होंने मंडी - खटिकान , ईदगाह , चार दरवाजा क्षेत्र के गरीब , दलित ,मुस्लिम व् वंचित तबके के बच्चो को शिक्षा की और अग्रसर करने हेतू कार्य किया  , इसके लियें वह अपने स्वंम के स्कूल के समय को छोड़ कर बाकी समय इन बच्चो को शिक्षा की और अग्रसर करने में लगाया | सामाजिक कार्यो में सक्रिय भूमिका - VERTEX EDUCATIONAL FOR SOCIAL DEVELOPMENT SANSTHAN { JAIPUR } पवन देव ने शिक्षा व् सामाजिक कार्यो के लीये अग्रणी संस्था  { वर्टेक्स एजुकेशनल  फॉर सोशल डेवलपमेंट संस्थान } से जुड़ कर जनसंपर्क पद कार्य करते हुयें , कन्य

जयपुर के युवा ' जो पहली बार वोट करने जा रहे है ' क्या सोचते है जाने ख़ास

जयपुर | जयपुर शहर लोकसभा चुनाव प्रचार जैसे - जैसे चरम सीमा पर पहुँच रहा है जयपुर की जनता किसे वोट दे किसे चुने यह एक बड़ा सवाल सामने आता है इसी सवाल को लेकर जयपुर के युवा जो पहली बार वोट करने जा रहे है क्या कहते है  जाने ख़ास - जयपुर शहर के लोकसभा प्रत्याशीयों में युवाओं की उमीद - बसपा प्रत्याशी पूर्व IAS उमराव सालोदिया से सकारात्मक    सर्वे अनुसार - भाजपा के राम चरण बोहरा - भाजपा के वर्तमान सांसद व् वर्तमान प्रत्याशी राम चरण बोहरा को लेकर जयपुर की जनता क्या कहती है जाने -  युवा वर्ग { 18 से 25 } - राम चरण बोहरा ने 5 लाख से अधिक वोटो से जीत हासिल की थी लेकिन जयपुर के युवाओं को रोजगार दिलाने में नाकामयाब रहे , युवा कहते है की प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्ट - अप , मेक इन इंडिया आदी मुख्य योजना लागू की लेकिन जमीन स्तर पर नहीं देखने को मिली  अपने पुरे कार्यकाल में लगभग बोहरा जी सुस्त नज़र आये , अधिकतर समय वह पार्षद , नाराज विधायकों मनाने में लगे रहे, इस बार भी भाजपा ने उन पर दावं चला है लेकिन जनता बदलाव चाहती है - जनता युवा ,पढ़ा लिखा ,सांसद चाहती है जो युवाओं को बेहतर भविष्य के निर्माण में यो

क्या पीएम मोदी और अमित शाह झूठ -जुमलो के सहारे चुनाव जीतना चाह रहे हैं -

Is PM Modi and Amit Shah want to win the elections with the lie [caption id="attachment_8294" align="alignright" width="831"] यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय है, जहाँ प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ दल के मुखिया तथा मुख्यमंत्री स्तर के राजनेता खुलकर चुनावी सभाओं में झूठ बोल रहे हैं, जनता को गुमराह कर रहे हैं, जनहित के मुद्दों से मतदाता का ध्यान हटा रहे हैं, ताकि पूर्व की भांति जनता उनकी लफ्फाजी के चक्रव्यूह में फंस जाए और उन्हें एक बार फिर सत्ता सौंप दे !  [/caption] जयपुर (टीम इकरा पत्रिका)। भारतीय लोकतंत्र को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है, क्योंकि यहाँ बहुत से देशों की कुल आबादी से अधिक करीब 90 करोड़ वोटर हैं। जितने किसी एक देश में तो होने का सवाल ही नहीं है। साथ ही यह वोटर पंचायत और नगर निकाय से लेकर विधानसभा एवं लोकसभा तक का हर पांच साल में चुनाव करते हैं। जनता को नीचे से लेकर ऊपर तक के तमाम लोकतांत्रिक राजाओं को बदलने का अधिकार है। भारतीय लोकतंत्र की एक और विचित्र बात भी है कि यहाँ देश के किसी न किसी कौने में हर वर्ष कोई ना कोई चुनाव होत

संघ के वो सात कलंक.

हिंदूवादियों की 7 शर्मनाक गलतियां, क्या देश कभी माफ कर सकेगा? भारत के इतिहास में कई ऐसे पन्ने हैं जो हिंदू महासभा और आरएसएस के नाम पर कलंक के तौर पर दर्ज हैं. अपने मजबूत प्रचारतंत्र के बूते क्या संघ ये दाग धो पाएगा. पढ़िए क्या हैं संघ के वो सात कलंक. 1. भारत के विभाजन के विचार की नींव रखना भारत विभाजन का समर्थन किया. विनायक दामोदर सावरकर. द्विराष्ट्र सिद्धांत के समर्थक थे जिन्ना और सावरकर दोनों चाहते थे कि एक हिंदू राष्ट्र बने और एक इस्लामिक राष्ट्र, कहा कि हिंदू और मुसलमान अलग देश हैं कभी साथ नहीं रह सकते. पहले सावरकर ये प्रस्ताव लेकर आए और इसके तीन साल बाद ही जिन्ना ने भी द्विराष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया. (हिंदू महासभा के 19वें अधिवेशन में सावरकर का भाषण, 1937) बाद में संघ ने भारत विभाजन का विरोध करने वाले गांधी की हत्या करके उन्हें ही विभाजन का दोषी ठहराने के लिए दुष्प्रचार किया गया. इतिहासकार कहते हैं कि संघ ने उग्र हिंदूवातावरण न बनाया होता तो शायद जिन्ना अलग राष्ट्र नहीं मांगते. 2. आर्मी को तोड़ने की साजिश भारत के खिलाफ साजिश. देश के आजाद होने के तीसरे साल ही संघ ने एक साजिश र

तो क्या संघ विरोधी छवि बनाई जा रही है राजस्थान मुख्यमंत्री राजे की -

तो क्या संघ विरोधी छवि बनाई जा रही है राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे की - उम्मीदवारों पर राष्ट्रीय नेतृत्व से टकराव जाने एक नज़र - जयपुर के दो बड़े समाचार -पत्र में  2 नवम्बर की खबरों पर भरोसा किया जाए तो प्रतीत होता है कि 7 दिसम्बर को होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों को लेकर सीएम वसुंधरा राजे और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व में टकराव हो गया है। वसुंधरा राजे 35 विधायकों के टिकिट नहीं काटना चाहती है तो पांच वर्ष तक उनके वफादार रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह खराब छवि वाले विधायकों को दोबारा से उम्मीदवार बनाना नहीं चाहते। अमितशाह हर हाल में राजस्थान में दोबारा से भाजपा की सरकार चाहते हैं। भाजपा के उम्मीदवारों को लेकर अब दिल्ली में मशक्कत हो रही है। 2 नवम्बर को दैनिक भास्कर में 95 विधायकों की सूची छपी है, जिन्हें वसुंधरा राजे ने दोबारा से उम्मीदवार बनवाना चाहती हैं। यह सूची देश के सबसे बड़े अखबार में छपी है इसलिए थोड़ा तो विश्वास करना ही पडेगा। भास्कर जैसा अखबार वसुंधरा राजे जैसी ताकतवर मुख्यमंत्री की सूची यंू ही नहीं छाप सकता। आखिर भास्कर की भी विश्वसनीयता की बात है। यदि इ

राजस्थान पत्रिका की बढ़ती मुश्किले - हो रहा है विरोध

गुलाब कोठारी- मालिक और प्रधान संपादक, राजस्थान पत्रिका आरक्षण को लेकर आपने एक सर्वे किया है, आपके अखबार को लेकर एक रिसर्च मैंने भी की है हाल ही में आपके अखबार के प्रथम पृष्ठ पर एक सर्वे छपा, जिसमें बताया गया था कि आरक्षण से किस प्रकार समाज में वैमनस्य बढ़ रहा हैं। हालांकि आरक्षण के खिलाफ ये कोई आपकी पहली खबर नहीं थी। आप लंबे समय से आरक्षण के खिलाफ मुहिम चला रहें हैं यह खबर उसकी बानगी मात्र है। कुछ दिनों पहले आरक्षण पर आपका एक संपादकीय भी आया था जिसमें आरक्षण के खिलाफ खूब जहर उगला गया था और जमकर ज्ञान पेला गया था। मेरा करीब 17 साल से राजस्थान पत्रिका का पाठक रहा है यानि मैं लगभग 8 साल का रहा होगा जबसे ही आपके इस अखबार को पढ रहा था हालांकि आपके आरक्षण के खिलाफ लिखे गए संपादकी [caption id="attachment_8423" align="alignright" width="601"] भंवर मेघवंशी[/caption] य के बाद से ही मैनें पत्रिका बंद कर दिया और लोगों को भी ऐसा करने के लिए कहा। मैं खुद एक पत्रकार भी हूं और शोधार्थी भी, इसलिए आपकी खबरों और सर्वे की मंशा साफ तौर पर समझ सकता हूं। मेरी अपनी राय है कि शाय

रावण की रिहाही से बहुजन समाज में ख़ुशी -

यूपी | भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्र शेखर उर्फ़ रावण के जेल से रिहा होने के अवसर पर बहुजन समाज में ख़ुशी की लहर छा गई है , बहुजन समाज रावण की रिहाही को दलित ,शोषित तबके के संघर्ष व् मान - सम्मान के साथ जोड़ा जा रहा है | युवा साथी विपिन द्वारा रावण की रिहाही के अवसर पर विचार गोष्टी का आयोजन  किया गया जिसमे  बाबा साहब अम्बेडकर जी की पूर्ति पर पुष अर्पित कर दीपक प्रव्जलित किया गया साथ ही बहुजन समाज ने मिठाई के साथ ख़ुशी बनाई गई | इस अवसर पर बाबा साहब के जीवन पर निम्न साथी वक्ताओं ने विचार रखे -  भोग नाथ पुष्कर ,सोबरन लाल ,जश पाल बोद्ध ,अलोक रावण ,विपिन कुमार ,जोगेंद्र प्रसाद गौतम ,श्याम किशोर बेचेन्न ,श्रीकांत बोद्ध ,सर्वजीत ,सुधांशु गौतम , गौरव बोद्ध , सुरेन्द्र गौतम ,शिव राम गौतम ,शत्रोहन लाल गौतम ,गौरव मिला ,आशु गौतम

शत्रुघ्न सिन्हा ने चुनावी मुद्दों को लेकर पीएम मोदी पर बोला तीखा हमला

पटना। पटना साहिब से भाजपा सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने गुजरात चुनाव में भाजपा द्वारा उठाए जा रहे चुनावी मुद्दों पर पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला है। शत्रुघ्न सिन्हा कर्नाटक चुनाव में पीएम मोदी ने इंदिरा गांधी का नाम लेकर कांग्रेस को घेरा. पावर कट को लेकर हालांकि कि जिस ट्विटर अकाउंट पर ये ट्वीट किए गए हैं वह वेरिफाइड नहीं हैं। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कल थम गया। सिन्हा ने कई ट्वीट किये उन्होंने ट्वीट में मोदी को टैग किया और कहा कि प्रधानमंत्री बनने से कोई बुद्धिमान नहीं बन जाता। उन्होंने कहा, श्रीमान। चुनाव प्रचार थम जाएगा। धन शक्ति के बावजूद जन शक्ति प्रबल होगी। उन्होंने मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दोनों को टैग करते हुए लिखा, यद्यपि मुझे एक स्टार प्रचारक के तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया जैसे बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश से लेकर गुजरात जैसे राज्य में नहीं किया गया। कारण हम सभी को पता है, मैं नम्रतापूर्वक एक पुराने मित्र, शुभचिंतक और पार्टी समर्थक के तौर पर सुझाव देता हूं ... हमें सीमा पार नहीं करनी चाहिए। हमें निजी नहीं होना चाहिए। मर्यादा बनाये रखते हुए मुद्दों क

एससी/ एसटी एक्ट को निष्प्रभावी करने के विरोध में -सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए आगे आएं युवा

भारत का अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति युगों-युगों से अश्पृश्यता,भेदभाव,निर्योग्यता, शोषण,उत्पीड़न एवं वंचना का शिकार रहा है । दुनिया में विश्व शान्ति का संदेश देने वाले तथागत गौतम बुद्ध,समतामूलक समाज निर्माण के पक्षधर , संत कबीर,संत रैदास,संत गाडगे द्वारा जनजागरण के माध्यम से जाति-प्रथा उन्मूलन,भेदभाव के समाप्ति पर बल दिया गया है। पेरियार रामास्वामी नायकर,ज्योतिबा राव फूले,बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर जैसे क्रांतिकारी महापुरुषों की प्रेरणा से स्फूर्त जन आंदोलन के फलस्वरूप अनुसूचित जाति/ जनजाति में लोकतांत्रिक चेतना का संचार हुआ। लेकिन आज SC/ST/OBC वर्गों के कानूनों पर ब्राह्मणवादी ताकतों ने चौतरफा हमला बोल रखा है।ये अन्ययायकारी ब्राह्मणवादी ताकतें पदोन्नति में आरक्षण को जड़ से ही खत्म कर दिया है और अब अनुसूचित जाति/ जनजाति के लिए बने कानून SC/ST एक्ट को निष्प्रभावी कर दिया गया है एक तरह से कहें तो खत्म ही कर दिया है। अब अगर SC/ST के किसी भी व्यक्ति पर कोई अन्याय होता है तो उस पर सीधे FIR नही हो सकेगी,मुकदमा दर्ज नही हो सकेगा बल्कि महीनों और सालों लग जाएंगे जांच होने में और तब भी जज के

"आत्मघाती गोल दागने में आर एस एस गैंग का कोई मुकाबला नही" - जाने केसे

एक बात तो साफ हो गयी, आत्मघाती गोल दागने में आर एस एस  गैंग का कोई मुकाबला नही ! पहले कन्हैया कुमार पर हाथ डालकर अपनी पतलून उतरवाई, फिर जिग्नेश मेवाणी पर हाथ डालकर भी वही किया ! हालांकि इनकी मूर्खता कि वजह से देश को दो सबसे बेहतरीन युवा लीडर मिल गये लेकिन इनकी सत्ता कि जड़ भी यहि दोनो हिलायेंगे ! केन्द्र से कॉंग्रेस को हटाने के लिए अपने ऐजेंट अन्ना को अनशन पर उतारा लेकिन वहाँ से इनकी छाती पर पत्थर फोड़ने केजरीवाल निकल आया ! यूपी में चंद्रशेखर रावण को गिरफ्तार कर इन्होंने खुद अपने ताबूत में कील ठोक ली, वो शेर आजाद होते हि पंजा मारेगा ! उसी तरह की  गलती शौर्य दिवस मनाने जा रहे दलित समुदाय के  लोगों पर हमला करके कर ली ! 200 सालों से मनते आर हे शौर्य दिवस को अबसे पाँच दिन पहले तक, दलित या प्रगतिशील तबके के अलावा कोई नहीँ जानता था ! लेकिन अब चार पाँच दिन में हि स्तिथि बदल गयी और इस बहाने दलितों ने आज माहाराष्ट्र बंद का सफल आयोजन कर अपनी ताकत, हिम्मत और एकता भी दिखा दी ! ये तो हुई इन गर्दभ गिरोह के कारनामों पर तीर पलटने वाली बात ! अब करते है, उत्सवो कि बात - तो बात ऐसी है, हमारा देश में  तो

नफरत के बीच ....................गंदी राजनीती

साहब यू ना बोओ ये नफरत के बीज............ खतरनाक होगा अंजाम इसका कहते है। आप क्यों इस देश की पांच हजार साल की संस्कृति और इतिहास पर प्रश्नचिह्न लगाने पर आमदा हो। कुछ दिन पहले तो यह नफरत इंसान के लिए ही थी। अब आप इसे जानवरो के लिए भी ले आये। क्यों? सिर्फ अंशान्ति फैलाने के लिए अगर आप ऐसा कर रहे हो तो सोचो आप एक हिंदू धर्म की दुहाई देते हो और दूसरी तरफ इसी धर्म को शर्मसार करने पर लगे हो । लंगूर तो हनुमान का ही रूप है साहब फिर उसके ऊपर ऐसा घृणित कार्य समझ से परे है। यह सोच हमे डूबा देगी साहब, दुर्भाग्य तो यह है की जिसने लंगूर को मारा उसका नाम भी पवन ही है और पूरे देश में आस्था का सूचक बजरंग बली भी वानर ही है। फिर आप क्यों हिंदू भावनाओं के साथ खेल रहे हो, क्यों टोपी तो कभी माला और तिलक की बात पर वोट बटोरना  चाहते हो। भला करण मैं चला मुझसे भला मिलिया न कोय, बुरा खोजन मैं चला मुझसे बुरा मिला न कोय।amzn_assoc_ad_type ="responsive_search_widget"; amzn_assoc_tracking_id ="politico24x7-21"; amzn_assoc_marketplace ="amazon"; amzn_assoc_region ="IN"; amzn_as

गुजरात में चला गहलोत जादू लेकिन अब राजस्थान में क्या –

गुजरात में चला गहलोत जादू लेकिन अब राजस्थान में क्या – राजस्थान की राजनीती बड़ी दिलचस्प रहती है कहने को तो यहाँ हिमाचल के जैसे 5 साल कांग्रेस फिर 5 साल बीजेपी का दौर देखने को मिलता है लेकिन वर्तमान समय राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के  लिए कुछ मुश्किल हो सकता है जिसका आभास मुख्यमंत्री राजे को स्वत ही हो चूका है या अपने गुप्त चरो और सेवारत पत्रकार द्वारा समय रहते जमीनी स्तर की  जानकारी मिल चुकी है तो मुख्यमंत्री राजे फिसलती सत्ता को  काबिज करने हेतु जनता के बीच पहुँच चुकी है लेकिन कांग्रेस अपने  शीर्ष नेतृत्व का ऐलान ना  करके अप्रत्यक्ष्य रूप से बीजेपी को सत्ता पर काबिज होने का एक अवसर और दे सकती है खेर अभी समय है और कांग्रेस पार्टी गुजरात चुनाव में अपने वजूद के लिए लड़ती हुई कुछ कामयाब हुई है जिसका असर राजस्थान में दिख सकता है लेकिन यह भी कटु सत्य है की वर्तमान राजस्थान कांग्रेस पार्टी अपने बड़े नेता ओ के भीतरी घात के लिए तैयार रहे | आज कांग्रेस पार्टी राजस्थान में 4 खेमो में बटी हुई है जिसको हम गहलोत ,सचिन पायलेट ,सी .पी जोशी और प्रतिपक्ष नेता रामेश्वर डूडी  के रूप में जान सकते है

डॉ०आंबेडकर के बिना अधूरा है भारत -

डॉ०आंबेडकर के बिना अधूरा है भारत,महापरिनिर्वाण दिवस पर आदरांजलि 20वीं शताब्दी के श्रेष्ठ चिन्तक, ओजस्वी लेखक, तथा यशस्वी वक्ता एवं स्वतंत्र भार त के प्रथम कानून मंत्री डॉ. भीमराव आंबेडकर भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माणकर्ता हैं। विधि विशेषज्ञ, अथक परिश्रमी एवं उत्कृष्ट कौशल के धनी व उदारवादी, परन्तु सुदृण व्यक्ति के रूप में डॉ. आंबेडकर ने संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. आंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक कहा जाता  है। डॉ. आंबेडकर ने कोलम्बिया विश्वविद्यालय से पहले एम. ए. तथा बाद में पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की । उनके शोध का विषय “भारत का राष्ट्रीय लाभ” था। इस शोध के कारण उनकी बहुत प्रशंसा हुई। 1923 में बम्बई उच्च न्यायालय में वकालत शुरु की अनेक कठनाईयों के बावजूद अपने कार्य में निरंतर आगे बढते रहे। डॉ. आंबेडकर की लोकतंत्र में गहरी आस्था थी। वह इसे मानव की एक पद्धति (Way of Life) मानते थे। उनकी दृष्टी में राज्य एक मानव निर्मित संस्था है। इसका सबसे बङा कार्य “समाज की आन्तरिक अव्यवस्था और बाह्य अतिक्रमण से रक्षा करना है।“ परन्तु वे राज्य को निरपेक्ष शक्ति नही मानते थे

बाबा साहेब द्वारा बनाया गया "भारतीय सविंधान" भारत को सदियों तक ऊर्जावान रखेगा- कपिल गौतम प्रेम

  सविंधान दिवस विशेष - बाबा साहेब द्वारा बनाया गया सविंधान सदियों तक भारत को ऊर्जावान बनाये रखेगा- कपिल गौतम प्रेम सविंधान महज एक औपचारिकता नही है यह एक समाज,एक गांव,एक देश सभी को ध्यान में रखकर और सभी अंगों से मिलकर बना है। 26 नवंबर 1949 को बाबा साहेब डॉ०आंबेडकर ने सविंधान को प्रस्तुत किया और अंगीकार कर भारत के लोगों को सौंप दिया गया।सविंधान दिवस पर अगर डॉ०आंबेडकर को याद ना किया जाए तो यह एकदम अधूरा है आइये एक नजर डालते हैं हम कैसे बने इस सविंधान के अंग-भारतीय राजनीति व समाज के ऐतिहासिक परिदृश्य में, डॉ. भीमराव अंबेडकर का उदय एक ऐसे जननेता के रूप में हुआ जिसने व्यक्तिगत संघर्ष की बुनियाद पर अपना सारा जीवन समाज की मुख्यधारा से विमुख, जीवन-यापन कर रहे, वंचितों, शोषितों, पीड़ितों के हक की लड़ाई में समर्पित कर दिया। समग्र विकास की उनकी यह विचारधारा (दृष्टिकोण) संविधान निर्माण के दौरान भी परिलक्षित हुई, जो समानता व सर्वकल्याण की वैचारिकी पर केंद्रित है। तत्कालीन परिस्थिति में संविधान का निर्माण निश्चय ही एक दुरुह कार्य था। ऐसे मुश्किल वक्त में बाबा साहेब ने बड़े ही धीरज के साथ प्रारूप समि

लोभ -लालच और प्रलोभन से अब नहीं हो सकेगा धर्म परिवर्तन - राजस्थान सरकार " धर्म स्वांतत्र्य विधेयक -2008 " को कानून बना सकती है |

 नहीं होगा आसा अब .......................धर्म परिवर्तन  जयपुर | राजस्थान सरकार अब लोभ -लालच और प्रलोभन के द्वारा धर्म परिवर्तन करने वाले संगठन पर लगाम लगाने हेतु  " धर्म स्वांतत्र्य विधेयक -2008 " को राष्ट्पति कोविंद द्वारा पास करवाने के लिए अपना उच्चतम प्रयास कर रही है .अगर " धर्म स्वांतत्र्य विधेयक -2008 "  कानून का रूप अख्तियार  कर लेता है तो राजस्थान राज्य में धर्म परिवर्तन करना आसान नहीं होगा , इसके लिए  सरकार से अनुमति लेनी होगी और सरकार की अनुमति के आधार पर ही व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन कर सकेगा | इस कानून के क्या होगे मायने है - एक ख़ास नजर  भारत वर्ष में जाती -भेद  भाव और लिंग के आधार पर उच्च -निच्च के  वर्ग में समाज को बाटा गया है , साथ ही भारतीय संविधान सभी वर्ग -धर्म जात -पात को निराधार मानते हुवे - समानता का अधिकार देता है किन्तु समाज में कथित कुछ धार्मिक संगठनो द्वारा गरीब और समाज के वंचित तबके को लोभ -लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन करवाने की घटनाए अकसर देखने और सुनने को मिलती है की कुछ धार्मिक संगठन , एन जी ओ  चोरी - छिपे गरीबो { sc / st } वर्ग के लोगो क

भाजपा की दलित राज +नीति .................

हमेशा की तरह नरेन्द्र मोदी ने मीडिया की तमाम आंशकाओं को मात देते हुए बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है। चर्चा इसलिए जोरों पर है क्योंकि कोविंद  दलित समुदाय से आते है। नब्बे के दशक को वो समय था जब देश में चारों ओर दलितों के नरसंहार की खबरें आम थी, दलितों पर हो रहे इन अत्याचारों के सिलसिले में दलित सांसदों का एक प्रतिनिधि मंडल जब तत्कालीन राष्ट्रपति से मिलने गया तो "महामहिम" ने दलित सांसदों से मिलने से मना कर दिया, उसी दिन से देश में दलित राष्ट्रपति की मां ग जोर पकडऩे लगी और इसी दबाव के कारण के.आर. नारायणन राष्ट्रपति बने। लेकिन वर्तमान समय और उस समय की परिस्थितियों में आधारभूत अंतर है, उस समय दलित सांसद एकजुट होकर लगातार दबाव बनायें हुए थे लेकिन आज अनुसूचित जाति की आरक्षित सीट से जीतकर आने वाले लगभग सभी सांसद 'सेट' है। हाल के समय में किसी दलित को राष्ट्रपति बनाए जाने जैसी कोई चर्चा या दबाव नहीं था लेकिन अचानक किसी दलित को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने सभी को चौंका दिया है। मोदी ने ये दांव चलकर विपक्ष को भी चारों खाने चित कर दिया ह