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प्रवासी मजदूर कौन हैं और यह राजनीति का शिकार क्यों हो रहें हैं - क्या इनकी जाति इनकी दुर्गति का कारण हैं

जाति जो कभी नहीं जाती - प्रवासी मजदुर 

आज हम जिस विषय पर बात करनें जा रहें हैं आप उससे कुछ सहमत भी हो सकते हैं तो कुछ हमें अपशब्द कह सकते हैं खैर आप को अपना पक्ष रखने का अधिकार भारत का संविधान देता हैं जिसे डॉ बाबा साहब अंबेडकर ने लिखा हैं |

आज वैश्विक महामारी कोविद 19 ने देश में नकारात्मक प्रभाव अधिक डाला हैं जिस प्रकार 1947 में देश का बटवारा होआ था तब भी गरीब दलित व असहाय लोग इन गैर जिम्मेदार नेताओं की बंदर बाट व निजी स्वार्थ के चलते देश का बंटवारा भी कर दिया था जिसके चलते लाखों ग़रीब दलित मुस्लिम मौत के मुंह मे समा गयें थे और भी हैवानियत की और भी घटनाओं का जिक्र इतिहास के पन्ने में आप को लिखा मिल जायेगा |

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आज वैश्विक महामारी कोविद ने प्रवासी मजदूर जो अपने जीवन ज्ञापन के लियें देश के एक कोने से दूसरे कोने जाता हैं जिससे वह अपना जीवन व्यापन कर सके और अपने पत्नी बच्चों का पालन पोषण कर सकें ,कोई भी प्रवासी मजदूर अपनी मर्जी से अपना घर नहीं छोड़ता  लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति व पारिवारिक जिम्मेदारिया उसे मजबूर कर देती हैं प्रदेश में मजदूरी करने के लियें |

देश मे मज़दूर कौन हैं  भारत देश मे आपके आर्थिक आधार पर आपकी स्थिती मान सम्मान आपकी जाति देखर तय कर दी जाति हैं अगर आप दलित , शुद्र या डॉक्टर कलेक्टर ही क्यों ना हो आप सामाजिक जीवन में अनपढ़ पंडित से गौण ही रहेगी जिसका ताजा उदाहरण कर्नाटक में एक सरकारी डॉक्टर ने कोविड 19 से बचाओं के लियें मास्क व पीपी किट मांगने की मांग कर दी जिसकी आवश्यक अस्पताल को थी जिसके बाद जब पता लगा कि डॉक्टर साहब दलित समुदाय से हैं तो उन्हें तुरंत प्रभाव से सेवानिवृत्त कर गिरफ्तार कर लिया गया |

दूसरी घटना उत्तराखंड में एक कोरेटाइन सेंटर में एक दलित महिला द्वारा मरीजों को भोजन दे रही थी वही 2 लोग जो चाचा भतीजा बतायें जा रहें हैं महिलाओं को अपशब्द गालियां दे रहा हैं और खाने को लात मारकर फेंक रहा हैं तो आप वर्तमान समय में भारत में फैले असली मानसिक वायरस जाति हैं जो कभी नहीं जाती हैं |

केंद्र सरकार क्यों नहीं ले रहीं प्रवासी मजदूरों का साथ

एक सर्व के अनुसार राजस्थान में जितने भी  प्रवासी मजदूर रहते हैं उन में से 98.66 दलित , पिछड़े वर्ग व मुस्लिम समुदाय से सम्बंध रखता हैं और बिहार , उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल, छतीसगढ़ आदी राज्यो से राजस्थान दिल्ली मध्यप्रदेश गुजरात आदी राज्यों में मजदूरी करता हैं

अब आप सामान्यता केंद्र सरकार की मोदी सरकार के कार्यप्रणाली व भाजपा की विचारधारा स्रोत आर एस एस का एजेंडा देखो , संघ व भाजपा सदैव ही दलित मुस्लिम  व आरक्षण विरोधी सोच के रहें हैं अब इस लॉक डाउन के चलते हुयें जब दलित पिछडे वर्ग व मुस्लिम जब भाजपा का विरोध कर रहें हैं और जातीय आधारित जनगणना व प्राईवेट क्षेत्र के आरक्षण की मांग कर रहें थे तो जिससे सरकार बैकफुट पर थी

अब केंद्र सरकार को मौका मिला गया कि वह इस दलित मुस्लिम व पिछड़े वर्ग जिनका जनसंख्या अनुपात का 94.56 % है इनको आर्थिक आधार पर कमज़ोर किया जाये ताकि 5 % के आसपास के सवर्ण लोग इस देश के संसाधनों पर कब्ज़ा जमायें रखें जैसे 2 भागों में 10 -10 व्यक्तियों को बिना upsc के परीक्षा पास कियें हुयें उन्हें IAS जैसे प्रतिष्ठ पद पर बैठा दिया जो कि असंवैधानिक प्रक्रिया हैं |

जयपुर से युवा नेता व पत्रकार पवन देव ने कहा कि -

केंद्र की मोदी सरकार एक और वंदे मातरम मिशन चला कर विदेश से भारतीय उच्च वर्गीय व संसाधन वाले लोगो को एयर लिफ्ट कर के भारत ला रहीं हैं अब देख लो विदेश में किस के बच्चे व लोग काम करते हैं वही भारत का निर्माण करने वाले गरीब दलित पिछड़े व मुस्लिमों को रोड़ो पर मरने के लियें छोड़ दिया हैं केंद्र की मोदी सरकार मजदूर विरोधी हैं इसलियें देश में ही प्रवासी मजदूरों की सुध नहीं ले पाई  जबकि दूसरी और आप देखोगे श्रावण माह में कावडियों के लियें भोजन पानी यहाँ  तक हेलिकॉप्टर से फूलों से वर्षा  तक की जा रही हैं और वही प्रवासी मजदूरों को दर - बदर मरने को छोड़ दिया  . यह एक हिडन एजेंडे के तहत केंद्र की मोदी सरकार काम कर रहीं हैं जो की गलत हैं  |

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