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आपका ज़मीर आख़िर जिन्दा क्यों है – 21 वीं सदीं में इंसान मलमूत्र में अपना मुहँ दे रहा है

Why is your conscience alive – in the 21st century man is giving his mouth in excreta

राजस्थान . जयपुर | भारत देश आज परमाणु सम्पन्न है और विश्व पटल पर अपनी एक साख रखता है लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी कुछ ऐसे अमानवीय द्रश्य हमारी आखों के सामने आ जाते है की हम अपने आप से ही कई सवाल कर बैठते थे आख़िर ऐसा क्यों – आज़ादी के 70 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी हमारे समाज के कर्णधार समाज ” वाल्मीकि ” जिन्हें अलग – अलग राज्यों में अलग -अलग नाम से जानते है जैसे राजस्थान में में वाल्मीकि .भंगी .मेहतर .झडमाली . हलालखोर . चुह्दा ,राउत ,हेमा . डोम .डोमर .हाड़ी ,लालबेग आदी तमाम नाम लेकिन इनका काम सिर्फ – सफाई करना है चाहे रोड पर हो या गटर – सीवरेज |
आज़ादी के बाद इस वंचित समाज को क्या मिला –
भारत देश 15 अगस्त 1947 में आज़ाद हो गया देश की सत्ता अब देश के नेताओं के पास आ गई देश के पहले प्रधानमंत्री बनने का गौरव पंडित जवाहर लाल नेहरु को मिला ,उनका पहला देश को संबोधित करने वाला भाषाण एक विजनरी था जिसकी चर्चा आज भी होती है | देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी और 26 जनवरी 1950 को डॉ बाबा साहब अम्बेडकर के अध्यक्ष्यता में ” भारत के संविधान का निर्माण हुआ और लागू हुआ जिसके अंतर्गत देश के सभी व्यक्तियों को सामाजिक ,आर्थिक और राजनेतिक न्याय ,विचार अभिव्यति , धर्म , प्रतिष्टा ,अवसर की समानता आदी अधिकार मिले लेकिन यह वाल्मीकि समाज के लियें उधार सा प्रतीत हो रहा है आज भी |
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sabir kureshi pic – shashtri nagar . jaipur .
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भारी – सामाजिक व्यवस्था
भारत देश में एक अभिशाप व्यवस्था है जिसे वर्ण व्यवस्था कहते है इस व्यवस्था ने वंचित वर्ग की जातियों को अद्रश्य गुलामी की बेड़ियों में इस कदर जकड़ रखा हैं की संवेधानिक रूप से SC जातिया जिन्हें अनुसूचित जातियों की श्रेणी में रखा गया है इनका जीवन आज भी चौनोतीपूर्ण है जैसे – वाल्मीकि , रेगर , बलाई ,चमार ,मेघवाल ,खटिक, बैरवा ,आदी इन जातियों का जीवन आज भी संवेधानिक अधिकार होने के बावजूद भी प्रतिदिन अपने स्वाभिमान के लियें संघर्ष करती नज़र आती है आज भी इन्हें अपनी शादी में घोड़ी पर नहीं बैठने दिया जाता , मूंछ नहीं रखने दिया जाता , आज भी इन जातियों को छुआ -छुत का शिकार होना पड़ता है जहाँ ग्रामीण क्षेत्रो में यह प्रत्यश होता है तो शहरी क्षेत्रो शाररिक कम और मानसिक छुआ छुत अधिक होने लगी है जबकि सरकार ने इन वंचित समाज की सुरक्षा के लियें ” SC/ST ACT – 1989 बना रखा है फिर भी असामाजिक लोगों द्वारा इन गरीब वंचित लोगो का शोषण करते रहते है जैसे – राजस्थान में डांगावास कांड , नागौर – पेचकस कांड ,अलवर कांड ,सीकर आदी तमाम जघन्य अपराध राजस्थान के इतिहास में दर्ज है – वैसे राजस्थान दलितों पर हत्याचार के मामले में प्रथम स्थान पर है जो की राज्य के लियें – शर्मनाक है |
सीवरेज वर्कर को लेकर लम्बे समय से काम कर रही सामाजिक कार्यकर्ता हेमलता कांसोटिया ने कहा की –
आज भी वाल्मीकि समाज के लोगों को समाज में सम्मानजनक काम अन्य जातियों द्वारा नहीं करने दिया जाता उनका विभिन्न तरिकों से बहिष्कार किया जाता हैं क्या आप ने अभी तक “वाल्मीकि मिष्ठान भण्डार , भंगी पवित्र भोजनालय , चमार फुटवियर , रेगर महाविधालय देखा है नहीं देखा होगा जबकि – शर्मा पवित्र भोजनालय आप ने अधिकतर हर जगह देखा होगा , शर्मा फुटवियर भी नहीं देखा होगा जबकि यही अंतर है उच्च जाती व् दलित जातियों में |
जब व्यक्ति को उचित काम नहीं मिलेगा तो वह मज़बूरी के कारण मलमूत्र में मुहँ देने को मजबूर है क्योकि उसे अपने बच्चे ,परिवार जो पालना है
उच्च न्यायलय ने सीवरेज वर्कर को लेकर 2005 में में दिशा – निर्देश दियें थे की सीवरेज से संबंधित सभी कार्य मशीनों के माध्यम से होगा लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आया |
में { हेमलता कांसोटिया } ने 2007 में दिल्ली उच्च न्यायलय में सीवरेज वर्कर को लेकर जनहित याचिका डाली गई जिसके परिणाम स्वरूप 2008 में दिल्ली न्यायलय व् सर्वोच्च न्यायलय द्वारा ने सीवरेज लाइन में व्यक्ति को उतरने पर पाबंदी लगा दी गई और सभी राज्यों को आदेश प्रेषित कर दियें . लेकिन आज भी सीवरेज वर्कर की स्थिति वही है की उसे आज भी अन्य व्यक्तियों के मलमूत्र में मुहँ देना पड़ रहा है | अब तो राज्यों सरकारों को इस अमानवीय काम पर पूर्ण रूप से रोक लगाना चाहियें और साथ ही सीवरेज वर्कर को सभी जरुरी सुरक्षा उपकरण देकर मशीनों की सहायता से काम किया जायें |
गाँधी जी 150 वीं वर्ष जयंती और वाल्मीकि समाज –
महात्मा गांधी और दलित समाज –
आजादी के समय से पूर्व ही महात्मा गाँधी दलित समाज और विशेष वाल्मीकि समाज के उद्धार के लियें काम कर रहे थे और उस वक्त सम्पूर्ण देश व् कांग्रेस पार्टी में गाँधी का विशेष स्थान था लेकिन जमीनी स्तर पर जबकि लगभग 100 साल से अधिक समय बीत चूका है लेकिन इस दलित समाज का विकास नहीं हो पाया और यह समाज आज भी मलमूत्र में मुहँ देने को मजबूर है
अब देश महात्मा गांधी की वर्ष भर 150 वीं जयंती मना रही है तो क्या महात्मा गाँधी को आदर्श मानने वाले बड़े नेता प्रधानमंत्री मोदी ,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत क्या इन दलित समाज के लोगों को इस अमानवीय काम से दूर नहीं कर सकते क्या यह महात्मा गांधी व् डॉ अम्बेडकर को सच्चा सम्मान नहीं दे सकते

story by – pawan dev 
{ news team – politico }

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