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दलित युवाओं के आइकॉन - चंद्र शेखर " रावण " आज़ाद - आख़िर टारगेट पर क्यों है जानें

दलित युवाओं के आइकॉन - चंद्र शेखर " रावण " आज़ाद - आख़िर टारगेट पर क्यों है जानें

जयपुर | अन्याय व स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे रावण  उर्फ़ चंद्रशेखर आज़ाद  का भविष्य आगें काटों भरा प्रतीत हो रहा है या यह कहे कि रावण को मानसिक प्रताड़ना देकर धीमे - धीमे ख़त्म करने की साज़िश विरोधियों द्वारा की जा रही है उसके पीछे कई अहम कारण हैं

अगर चन्द्र शेखर रावण एक आंदोलनकारी से आगे की सोच रखते है तो उन्हें बिना देर करें अपनी - राजनीतिक पार्टी का निर्माण कर के उनके संगठन " भीम आर्मी ' को संवैधानिक अमलीजामा पहनाने में देर नहीं करनी चाहिये जिससे सही मंच पर संवैधानिक रूप से अपनी बात वंचित वर्ग - पीड़ित के लियें उठा सकें  |

चंद्र शेखर रावण के जीवन के पन्ने देखे तो उनका इतिहास व संघर्ष देखते है ही बनता है -

सहारनपुर के एक छोटे से गाँव  कासगंज से चंद्रशेखर का संर्घष शुरू होता है गाँव के ही एक छाजू  सिंह ठाकुर इंटर कालेज में दलितों छात्र -छात्रों से छुआछूत - मारपीट की  घटना सामान्य होती थी , गाँव के ही कुछ लडको ने एक ग्रुप बनाया जिसका काम सामाजिक कार्य करना था लेकिन डॉ बाबा साहब अम्बेडकर जी की जयंती  व्  शिवाजी

 

साल 2017 में शब्बिरपुर गाँव में

 

 

 

क्या राजनेतिक रूप से रावन का इस्तेमाल हो रहा -

वर्तमान समय  में  चन्द्र शेखर

कौन हैं चंद्रशेखर उर्फ 'रावण'



साल 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों और सवर्णों के बीच हिंसा की एक घटना हुई। इस हिंसा के दौरान एक संगठन उभरकर सामने आया, जिसका नाम था भीम आर्मी। भीम आर्मी का पूरा नाम 'भारत एकता मिशन भीम आर्मी' है और इसका गठन करीब 6 साल पहले किया गया था। इस संगठन के संस्थापक और अध्यक्ष हैं चंद्रशेखर, जिन्होंने अपना उपनाम 'रावण' रखा हुआ है। पेशे से वकील चंद्रशेखर के परिवार में दो बहनें हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है और दो भाई हैं। चंद्रशेखर खुद भी अविवाहित हैं। उनका दूसरा भाई पढ़ाई के साथ-साथ एक मेडिकल स्टोर पर नौकरी करता है। एक चचेरा भाई है, जो इंजीनियर है।



 

 

 

 

भीम आर्मी के संस्थापक और अध्यक्ष चंद्रशेखर उर्फ रावण के ऊपर से रासुका हटाने के योगी सरकार के फैसले के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया है। गुरुवार रात करीब 2 बजे जेल से बाहर निकलते ही चंद्रशेखर पुराने रंग में दिखे और ऐलान किया कि 2019 में भाजपा की सत्ता को उखाड़ फेंकेंगे। चंद्रशेखर मई 2017 से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत जेल में बंद थे। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि अगले 10 दिनों में भाजपा सरकार मुझे किसी ना किसी आरोप में फिर से फंसाने की कोशिश भी करेगी। आखिर कौन हैं ये चंद्रशेखर उर्फ रावण और क्या है उनकी भीम आर्मी, जिसने बेहद कम समय में ही पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपना अच्छा खासा प्रभाव बना लिया। आइए जानते हैं..





 

गांव के कुछ युवाओं ने मिलकर बनाई भीम आर्मी


शब्बीरपुर में हुई हिंसा के बाद 'रावण' ने 9 मई 2017 को सहारनपुर के रामनगर में महापंचायत बुलाई। इस महापंचायत के लिए पुलिस ने अनुमति नहीं दी, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए महापंचायत की सूचना भेजी गई। सैंकड़ों की संख्या में लोग इसमें शामिल होने के लिए पहुंचे, जिन्हें रोकने के दौरान पुलिस और भीम आर्मी के समर्थकों के बीच संघर्ष हुआ और इसके बाद चंद्रशेखर के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। करीब छह साल पहले 2011 में गांव के कुछ युवाओं के साथ मिलकर चंद्रशेखर ने 'भारत एकता मिशन भीम आर्मी' का गठन किया था। भीम आर्मी आज दलित युवाओं का एक पसंदीदा संगठन बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस संगठन से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। खास बात यह है कि इस संगठन में दलित युवकों के साथ साथ पंजाब और हरियाणा के सिख युवा भी जुड़े हैं। सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी यूपी में यह संगठन अपनी खास पहचान बनाए हुए है।






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